पड़ताल:कैथी भाषा में फर्जी केवाला बना जमीन कब्जाने वाला गिरोह सक्रिय, लाखों रुपए में होती डीलिंग

सहरसाएक महीने पहले
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भवेश पासवान के घर में रखे कागजात जिसे पुलिस ने किया था बरामद। - Dainik Bhaskar
भवेश पासवान के घर में रखे कागजात जिसे पुलिस ने किया था बरामद।
  • सहरसा में जमीन के दलाल व भू-माफियाओं के कारण लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाएं
  • रिफ्यूजी कॉलोनी में हुई हत्या मामले में भी जमीन के अ‌वैध दस्तावेजों की कहानी आई सामने

सहरसा में सक्रिय अंचलकर्मी के दलाल, भू-माफिया, के गठजोड़ से किसी की जमीन पर कोई बाहुबली और आपराधिक गिरोह कभी भी कब्जा कर सकता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं कि आपके पास सही केवाला और जमीबंदी हो। क्योंकि सहरसा में पुरानी कैथी भाषा में फर्जी केवाला तैयार करने वाला गिरोह सक्रिय है। उक्त फर्जी केवाला पर भू-माफिया अधिकारियों को मुंहमांगी कीमत देकर पुराने जमाबंदी को रद्द कर नया जमाबंदी कायम करा लेता है। शहर में सही जमीन का फर्जी केवाला तैयार कर किसी जमीन को विवादास्पद बना फिर उस पर भू-माफिया द्वारा आपराधिक गिरोहों से मिलकर मनमानी कीमत पर बेचने का खेल थमने वाला नहीं है। चूंकि इस सौदेबाजी में रुपए की बड़ी डील होती है इसीलिए इसके विवाद भी काफी सामने आ रहा है। हत्या, हिंसक झड़प और कानून व्यवस्था की स्थिति भी खड़ी हो जा रही है। दर्ज आपराधिक आंकडों को देखें तो 85 फीसदी जमीन विवाद से जुड़ा है। जिले में अधिकांश हत्याऐं जमीन विवाद में हुई है। खास बात यह कि गठजोड़ में पुलिस के साथ सत्ताधारी दलों के स्थानीय संगठनों में पदाधिकारी बने लोग भी कई तरह की भूमिका में रहते हैं। शहर के रिफ्यूजी कॉलोनी में रविवार को एक जमीन पर जबरन कब्जा के दौरान हुई हिंसक वारदात और हत्या के मामले में पुलिसिया जांच भले ही जिस मुकाम पर जाए लेकिन मीडिया पड़ताल में भू-माफियाओं के पर्दे के पीछे की कहानी ही सामने आयी है। रिफ्यूजी कॉलनी के भवेश पासवान द्वारा अपने घर के बगल में जिस जमीन पर चहारदिवारी दी जा रही थी उस पर उसका गोतिया बनारसी पासवान ने पहले से अपना दावा ठोक रहा था।

बदमाशों की मदद से बनारसी ने जमीन पर रोका था काम
बनारसी पासवान अपनी जमीन बताते हुए आपराधिक गिरोह से मदद लेकिर निर्माण कार्य रोका। बाद में यह विवाद हिंसक घटना का रूप ले लिया। उस जमीन के पीछे की कहानी भी फर्जी दस्तावेज पर आधारित दिखती है। पड़ताल में यह बात सामने आयी कि भवेश पासवान ने उक्त विवादास्पद जमीन की घेराबंदी से ठीक एक दिन पहले शनिवार को सदर थाना में आयोजित जनता दरबार में अंचलाधिकारी लक्ष्मण प्रसाद को आवेदन देते हुए कहा था कि दूसरा पक्ष बनारसी पासवान अपना कबाला बताते हुए किसी और को यह जमीन रजिस्ट्री कर रहा है।

सीओ की नोटिस जारी होने के दूसरे ही दिन हुई घटना
अंचलाधिकारी के अनुसार इस संबंध में उन्होंने बनारसी पासवान के नाम एक नोटिस भी जारी किया लेकिन दूसरे ही दिन यह घटना हो गयी। अब सवाल उठता है कि भवेश पासवान को इतनी जल्दबाजी क्या थी कि अंचलअधिकारी को कुछ निर्णय आने से पहले ही दूसरे दिन ही वह उस जमीन की घेराबंदी क्यों शुरू कर दी। यह जांच का विषय हो सकता है। मामले की पड़ताल के दौरान मंगलवार को कहरा अंचल कार्यालय परिसर में कई लोगों ने भास्कर को बताया कि भवेश पासवान शहरी क्षेत्र के राजस्व कर्मचारी नीरज कुमार के मुंशी के रूप में अवैध ढंग से काम करता है। भवेश पासवान लोगों से जमीन संबंधी कागजात लेकर अंचल कार्यालय में कार्यरत कर्मी की सांठगांठ से अपनी पैठ अधिकारियों तक पिछले 10 बर्षों से बनाए रखा है। कहते हैं कि उसकी सांठगांठ दर्जनों भू-माफियाओं से भी है। रविवार को उनके द्वारा की जा रही घेराबंदी के दौरान हुई हिंसक वारदात और उसमें एक आपराधिक प्रवृति के व्यक्ति की हत्या के बाद उसके घर पर मृतक के समर्थकों द्वारा किए गए हमला और तोड़फोड़ की जांच में पहुंची पुलिस को भवेश पासवान के घर से सैकड़ों लोगों की जमीन से जुड़े कागजात, जमाबंदी संबंधी आवेदन , जांच रिपोर्ट की फोटो काॅपी बरामद की।

भवेश पासवान के घर से मिले जमीन के दस्तावेजों पर नहीं मिली सरकारी मुहर
हालांकि हमलावरों ने उनके घर में रखे कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क को क्षतिग्रस्त कर दिया था। स्पष्ट है कि भवेश घर से लोगों की जमीन संबंधी कागजात तैयार करने वाला काम भी करता है। हलांकि मंगलवार को इस घटना से संबंधित आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसपी लिपि सिंह ने पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर कहा कि चूंकि भवेश पासवान के घर से बरामद जमीन संबंधी कागजात पर सरकारी मुहर नहीं लगी दिखी है इसीलिए अभी यह कहना संभव नहीं है कि उसके घर किसी तरह का जमीन संबंधी फर्जी कागजता तैयार करने का कारोबार चलता है।
सीओ ने स्वीकारा जिले में फर्जी केवाला के मामले आ रहे सामने
भास्कर संवाददाता के सवाल के जबाब में कहरा के अंचलाधिकारी लक्ष्मण प्रसाद ने माना कि यहां फर्जी केवाला का मामला भी सामने आ रहा है। जनता दरबार के अलावा लोगों द्वारा प्रस्तुत केवाला को देखने के बाद संदेह होने पर इसकी जांच निबंधन कार्यालय से करायी जाती है। हलांकि कार्रवाई के संबंध में पूछने पर अंचल अधिकारी कहते हैं कि जमीन संबंधी विवाद में हमलोग क्या उचित है आवेदक को बता देते हैं। उन्होंने कहा कि एक जमीन के कई बार बेचने, एक ही भाई द्वारा दूसरे के हिस्से की जमीन भी बेच देने के ज्यादातर विवाद सामने आता है। इस कारण भी जमीन विवादास्पद हो जाती है। और हिंसक वारदात होती है।

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