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असुविधा:डेढ़ साल से कैदियों की परिजनों से नहीं हुई मुलाकात, फोन की सुविधा भी नहीं मिल रही

सहरसा12 दिन पहले
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मंडल काड़ा सहरसा की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
मंडल काड़ा सहरसा की फाइल फोटो।
  • पूर्व सांसद आनंद मोहन ने की कैदियों के साथ अनशन की घोषणा, लवली आनंद ने दी जानकारी
  • पुराने बंदियों को कोरोना का दूसरा और नए को पहला डोज भी नहीं मिल रहा

कोरोना के बहाने पिछले डेढ़ साल से सहरसा जेल में बंद कैदियों को उनके परिजनों से मुलाकात नहीं होने दिया जा रहा। साथ ही ई-मुलाकात या दूरभाष से बातचीत कराने की व्यवस्था की गई थी उसे भी बंद रखा गया है। सामान और पैसे आना भी बंद कर दिया गया। समयावधि की समाप्ति पर भी पुराने बंदियों को कोरोना का दूसरा और नए को पहला डोज नहीं दिया गया है। ऐसे में एक साथ सैकड़ों बंदियों के कोरोना संक्रमित होने की प्रबल संभावना जताई गई है। जेल की इन मूलभूत समस्याओं को लेकर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सैकड़ों बंदियों के साथ शुक्रवार 23 जुलाई से आमरण अनशन प्रारंभ करने की घोषणा कर दी है। जेल में बंद आनंद मोहन के अनशन पर जाने की पुष्टि पूर्व सांसद लवली आनंद ने दूरभाष पर की है। उन्होंने कहा कि यह बंदियों के साथ जेल प्रशासन का अत्याचार है। कोर्ट के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। बंदियों के अधिकार को दफन किया जा रहा है। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आमरण अनशन से बीमार बंदियों और महिला कैदियों को अलग रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि करीब 400 से अधिक बंदी अनशन में शामिल होने का अनुमान है।

400 से अधिक बंदी अनशन में शामिल हो सकते

कोरोना के बहाने पिछले डेढ़ साल से सहरसा जेल में बंद कैदियों को उनके परिजनों से मुलाकात नहीं होने दी जा रही है। इतना ही नहीं ई-मुलाकात या दूरभाष से बातचीत कराने की व्यवस्था की गई थी उसे भी बंद रखा गया है। सामान और पैसे आना भी बंद कर दिया गया। समयावधि की समाप्ति पर भी पुराने बंदियों को कोरोना का दूसरा और नए को पहला डोज नहीं दिया गया है। ऐसे में एक साथ सैकड़ों बंदियों के कोरोना संक्रमित होने की प्रबल संभावना जताई गई है। जेल की इन मूलभूत समस्याओं को लेकर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सैकड़ों बंदियों के साथ शुक्रवार 23 जुलाई से आमरण अनशन प्रारंभ करने की घोषणा कर दी है। जेल में बंद आनंद मोहन के अनशन पर जाने की पुष्टि पूर्व सांसद लवली आनंद ने दूरभाष पर की है। उन्होंने कहा कि यह बंदियों के साथ जेल प्रशासन का अत्याचार है। कोर्ट के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। बंदियों के अधिकार को दफन किया जा रहा है। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आमरण अनशन से बीमार बंदियों और महिला कैदियों को अलग रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि करीब 400 से अधिक बंदी अनशन में शामिल होने का अनुमान है।

जेल में समुचित चिकित्सा और दवा का घोर अभाव है

भीषण गर्मी के बावजूद पंखे नहीं लगाए गए। पुराने प्रायः सभी पंखे खराब हैं जिसकी मरम्मत नहीं की जा रही है। वर्षों से पूरे जेल का वायरिंग जर्जर है । स्थायी बिजली और चापाकल मिस्त्री नहीं है। शौचालय खराब पड़े हैं। सभी पखाना टंकी फटे और भरे पड़े हैं। चंद दलाल टाइप क़ैदी को छोड़ वर्षों से बंदियों को पारिश्रमिक राशि नहीं दी गयी है। कैदियों को मिलने वाले परिहार वर्षों नहीं दिए गए हैं। कई अनशन और आश्वासन के बावजूद जेल के अंदर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पायी है ।वर्षों से जिम खराब है, खेल-कूद की कोई व्यवस्था नहीं है। जर्जर पाकशाला, क्षमता से अधिक बंदियों के बावजूद बर्तन, थाली-ग्लास, कपड़े-साबून की भारी कमी है। मांगों को लेकर 23 जुलाई से बंदियों के साथ आनंद मोहन अनशन पर जाएंगे।

सामान नहीं आने दिया जाता
बंदियों द्वारा इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार मंडल कारा सहरसा में रह रहे बंदियों की मूलभूत समस्याओं के निदान की मांग को लेकर पूर्व सांसद आनंद मोहन कल यानी 23 जुलाई से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे। पूर्व सांसद के साथ सैकड़ों बंदी भी अनशन पर बैठेंगे। बंदियों की समस्या है कि उसे कोरोना के बहाने पिछले डेढ़ साल से मुलाकात, सामान और पैसे नहीं आने दिया जा रहा है। ई मुलाकात या दूरभाष पर बातचीत भी नहीं कराई जा रही है।

अनशन स्वीकार नहीं किया गया

कोरोना को लेकर मुलाकात बंद है। मंडल कारा में समस्याएं हैं। क्षमता से अधिक कैदी हैं। मार्च 2021 तक बंदियों को उनका पूरा पारिश्रमिक दिया जा चुका है। कोरोना वैक्सीन के दूसरे डोज को लेकर जिला अधिकारी से बात की गई है। जल्द ही कोरोना का दूसरा डोज लगाया जाएगा। वहीं नए कैदियों को पहला डोज भी लगाया जाएगा।
साथ ही उन्होंने कैदियों की मांग पर अपनी अनभिज्ञता जाहिर की है। वहीं उन्होंने आगामी 23 जुलाई से आमरण अनशन पर जाने की बातों को भी फिलहाल स्वीकार नहीं किया है।
सुरेश चौधरी, जेल सुपरिटेंडेंट

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