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चुनावी मुद्दा:मैं आरओबी; नेताजी कृपया मेरे नाम पर वोट मांगना बंद कीजिए, क्योंकि जनता सब जानती है

सहरसा16 दिन पहले
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  • दो दशक में तीन बार हुआ शिलान्यास, लेकिन अभी तक शहर के बंगाली ढाला पर नहीं बन सका ओवरब्रिज

मैं, सहरसा के बंगाली ढाला पर बनने वाली रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी)। चुनावी रणभेरी बजते ही मेरी जरूरत और निर्माण कराए जाने का वायदा सहरसा की फिजाओं में तैर रहा है। चुनाव चाहे लोकसभा का हो या विधानसभा का, हर बार मेरे निर्माण की चर्चा होती है, बड़ी-बड़ी गाड़ियों से पहुंचने वाले सफेद खादी दारी नेता मेरे निर्माण का आश्वासन देते है। लेकिन रिजल्ट के बाद फिर सब धुआं हो जाता है। मैं भी अब अपने निर्माण की चर्चा सुन-सुन कर पक चुकी हूं। मेरे ना होने से रोज घंटों जाम में फंसने वाली पब्लिक भी पूरी सच्चाई जानते हैं। ऐसे में बेहतर है इस बार नेता लोग, मेरे नाम पर वोट मांगना बंद कर दें। तीन-तीन रेल मंत्रियों ने मेरा शिलान्यास किया फिर भी एक ईंट आज तक नहीं जोड़ी गयी। बंगाली बाजार समपार संख्या 31 पर मेरे निर्माण की घोषणा सबसे पहले तत्कालीन रेल मंत्री रामविलास पासवान ने वर्ष 1996 में तब की थी। इसके बाद तत्कालीन रेल राज्यमंत्री दिग्विजय सिंह, फिर रेल मंत्री लालू प्रसाद और फिर रेल राज्यमंत्री रहे अधीर रंजन चौधरी ने उस समय के सांसद रहे शरद यादव की मौजूदगी में इसी आरओबी का शिलान्यास किया था। सहरसा से मानसी, पूर्णिया और सुपौल के लिए तीन दिशा में रेल गुजरी है। चुनाव से पहले टेंडर निकल जाने की बात थी लेकिन वह हुआ नहीं। अब मेरी लागत बढ़ कर 170 करोड़ हो गयी है।

प्रति घंटे औसतन पांच बार जाम: बंगाली रेल ढाला से रोजाना तीन हजार से अधिक वाहनों की होती है आवाजाही

बंगाली बाजार रेल ढाला से रोजाना औसतन 10 हजार से अधिक लोग और 3 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। रेलवे स्टेशन के करीब होने के कारण सेंटिंग के दौरान भी अक्सर यह ढ़ाला गिरा रहता है। जिससे वाहनों का लंबा जाम औसतन प्रति घंटे में 5 बार लगता है। आरओबी के बन जाने से शहर के लोगों को ही जाम से मुक्ति नहीं मिलेगी बल्कि प्रत्येक दिन अन्य कार्यों से दूसरे क्षेत्र से सहरसा शहर आने वाले लोगों को भी भारी राहत मिलेगी।

जाम से मिलेगी मुक्ति: बाहर के कारोबारी आएंगे, रोजगार बढ़ेगा

पुल निर्माण निगम की डीपीआर के अनुसार मेरी लंबाई 925 मीटर चौड़ाई 8.50 मीटर होगी। पूरब बाजार मैं पेट्रोल पंप के पास से शुरू होकर शंकर चौक होते महावीर चौक से पहले खत्म होऊगी। मेरे निर्माण से जाम की समस्या समाप्त होने के बाद कारोबारी आएंगे और रोजगार बढ़ेगा।

उद्योग लगे तो पलायन थमे

आरओबी निर्माण के साथ-साथ सहरसावासी जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज और एम्स के निर्माण की मांग भी कर रहे हैं। बैजनाथपुर कागज कारखाना को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोसी क्षेत्र में यदि मक्के से संबंधित कोई उद्योग शुरू किया जाए तो पलायन बहुत हद तक रुकेगा।

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