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उत्पादन:पटसन की खेती को 300 एकड़ भूमि की मिली स्वीकृति

सोनवर्षाराज20 दिन पहले
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मोकामा पंचायत में सुखाया जा रहा पटसन का रेशा। - Dainik Bhaskar
मोकामा पंचायत में सुखाया जा रहा पटसन का रेशा।
  • 90-95 तक पटसन की खेती के लिए मशहूर अंचल क्षेत्र में मात्र सौ एकड़ में सिमटी खेती

अंचल क्षेत्र कभी सन पटुआ या फिर पटसन खेती के लिए मशहूर हुआ करता था, विशेषकर 90-95 तक। सन की खेती के लिए मशहूर इस क्षेत्र का नामकरण भी सन से मिलता जुलता नाम सोनवर्षा रखा गया। यहां एक राजघराना भी था इसलिए सोनवर्षा के साथ राज जोड़कर सोनवर्षा राज हो गया। चूंकि पूरा क्षेत्र बाढ़ की वजह से छह माह तक पानी में डूबा रहता था, इसलिए पटसन की फसल को सड़ाने में और उससे सन निकालने में आसानी होती थी। 90-95 तक बहुसंख्यक किसानों द्वारा पटुआ की खेती की वजह से सोनवर्षा राज बाजार पटुआ की खरीद बिक्री के लिए एक बड़ी मंडी थी। लेकिन समय से साथ पटसन की जगह मक्के ने ले लिया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में पटसन की खेती सिमटकर मात्र 105 एकड़ हो गई है। वो भी क्षेत्र के मोकामा पंचायत तक। इसका मुख्य कारण पॉलिथीन की बहुतायत ने जुट उद्योग को समाप्त करते हुए जुट अर्थात पटसन के बाजार को ही खत्म कर दिया। जिससे पटुआ की खेती की प्रासंगिकता ही खत्म कर दी गई। पटसन के रेसे से मुख्यतः कागज, दरी, बोरा, तिरपाल, झोला व रस्सी और जुट का थैला बनाया जाता है। वर्तमान में इन वस्तुओं पर प्लास्टिक का कब्जा हो गया है। हांलाकि सरकार द्वारा प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाए जाने से पुनः पटसन के बाजार का दिन लौटने की उम्मीद बढ़ी है। क्षेत्र में मुख्य रूप से पटसन के दो किस्म पटुआ और कश्मीरा की खेती की जाती थी। जिसमें कश्मीरा पौधे का रेशा सफेद और महीन होता है जबकि पटुआ का मटमैला होने होने के साथ मोटा भी होता है। 35 सौ रुपए के बीज का किट किसानों को सौ फीसद अनुदान पर दिया जा रहा। खेती के लिए सरकारी मदद-कृषि विभाग द्वारा पटसन की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 35 सौ रुपए के बीज का किट किसानों को सौ फीसद अनुदान पर दिया जा रहा है। बाजार भाव-उन्नत किस्म के पटसन के रेशा का गुलाबबाग मंडी में 48 सौ से 5 हजार रुपए, तो निम्न किस्म के रेशे का मूल्य 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक है। खेती की लागत-पटसन की खेती में प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आता है। जिला कृषि पदाधिकारी दिनेश प्रसाद सिंह बताया कि पटसन की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 21-22 में जुट प्रत्यक्षण के तहत सोनवर्षा राज व पतरघट में 300 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान की गई है।

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