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परेशानी:तटबंध के बीच निर्वासित गांवों के लोग बाढ़ के बीच भी घर व संपत्ति छोड़ने को तैयार नहीं

सहरसा10 महीने पहले
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बलुआहा-बिरौल पथ के बीच पुनाच में मवेशी का बसेरा बनाते लोग व महिषी के झाड़ा गांव से ऊंचे स्थान पर पशु के साथ निकलते लोग। - Dainik Bhaskar
बलुआहा-बिरौल पथ के बीच पुनाच में मवेशी का बसेरा बनाते लोग व महिषी के झाड़ा गांव से ऊंचे स्थान पर पशु के साथ निकलते लोग।
  • बलुआहा-बिरौल पथ के पुनाच सहित आसपास के लोग मवेशी के लिए बना रहे बसेरा
  • मवेशी व चारा की समस्या ने लोगों को घर छोड़ने को कर दिया मजबूर

कोसी एवं बलान नदी में जलवृद्धि को लेकर सहरसा व दरभंगा के सीमावर्ती क्षेत्रों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। वही लोगों ने घर छोड़ कर तटबंध के अंदर ही किसी उंचे स्थान पर तत्काल शरण ले लिया है। कोसी तटबंध के अंदर निर्वासित लोग अपने अनुभव के आधार पर अभी भी घर छोड़ने के लिए घबराहट में नहीं हैं। ऐसे लोगों को कोसी नदी के डिस्चार्ज पर नजर टिकी हुई है।  कोसी नदी में जब तक 3 लाख से अधिक वाटर डिस्चार्ज नहीं होगा, दोनों तटबंध के बीच निर्वासित गांवों की आबादी कठिन से कठिन परिस्थिति में घर व संपत्ति छोड़ने को तैयार नहीं होती है। बाढ जैसी प्राकृतिक आपदा में भी कोसी वासी अपने अनुभवों का पूरा लाभ उठाने से नहीं चुकते हैं। थोड़े भी आर्थिक रूप से सक्षम परिवार ऊंचे स्थल पर निर्मित घरों के दरवाजे पर नाव लगा कर तैयार हैं। इसके बाद भी कुछ ही परिवार अभी घर छोड़ रहे हैं। वैसे अभी तटबंध के अंदर निर्वासित लोगों के समक्ष अपनी जान-माल से ज्यादा पशुचारा की समस्या परेशान अभी से ही करने लगी है। इसलिए पश्चिमी कोसी तटबंध से सटे निर्वासित गांव के लोग गंडौल चौक से पश्चिम बलुआहा-बिरौल पथ के किनारे पुनाच सहित आसपास के लोगों ने मवेशी को रखने के लिए बांस-बल्ला के सहारे घर बसेरा बनाना शुरू कर दिया है। 

कोसी और बलान के बाढ़ से प्रभावित हैं लोग
महिषी प्रखंड अंतर्गत आरा पट्‌टी, ऐना एवं झाड़ा पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बलुआहा-बिरौल पथ से मुरली ढलान से ही लोगों की समस्या शुरू हो जाती है। घोंघेपुर पंचायत के चौरागांव, बघवा, सोहरबा, रौती पुनर्वास, डुमरी सुपौल, खोराबतपुर, बघवा पुनर्वास, पुनाच एवं वीरगांव की स्थिति भी घर-घर पानी आ गया है। लोगों ने घर खाली कर बकरी, बक्सा, अनाज लेकर उंचे स्थल जाना शुरू कर दिया है। दरभंगा सीमा से सटे रघुनाथपुर, बरही, कोकरवा भी बलान की बाढ़ से जलमग्न हो गया है। सभी के समक्ष सबसे पहले मवेशी व चारा की समस्या ने घर छोड़ने को मजबूर कर दिया है।

अभी 23 सरकारी नाव का प्रबंध
बाढ पूर्व लोग ऊंचे स्थान की खोज कर झोपड़ी खड़ा कर बचाव की तैयारी कर लेते हैं। कोसी तटबंध के अंदर अंचल क्षेत्र के प्रायः सभी गांव पानी से घिर चुका है। इसलिए बचाव के लिए ऊंचे स्थान की तैयारी करना शुरू कर दिया है। अब तक लोगों की सुरक्षा एवं यातायात के लिए 23 सरकारी नाव बहाल किए गए हैं। इससे लोगों की कठिनाई दूर किया जा रहा है।
-मो. अहमद अली अंसारी, सीओ, महिषी।

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