पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

दलाली का सबूत:जिस गर्भवती को 11 दिन तक टरकाया, उसका निजी क्लीनिक में पीएचसी की डॉक्टर ने 2 घंटे में किया ऑपरेशन

सहरसा2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बेंगहा स्थित नर्सिंग होम में मीरा देवी का हो रहा इलाज, जहां वो अपने बच्चे के साथ सुरक्षित हैं और चेहरे पर है खुशी। - Dainik Bhaskar
बेंगहा स्थित नर्सिंग होम में मीरा देवी का हो रहा इलाज, जहां वो अपने बच्चे के साथ सुरक्षित हैं और चेहरे पर है खुशी।
  • सदर अस्पताल में 26 दिसंबर को गर्भवती हुई थी भर्ती, डॉक्टर ने जॉन्डिस पीड़ित बता ऑपरेशन टाल दिया था

प्रतिमाह सरकारी डाक्टर और कर्मियों के वेतन पर 67 लाख से अधिक राशि खर्च करने वाली सरकार के सदर अस्पताल का हाल यह है कि यहां एक गरीब मरीज का साधारण ऑपरेशन तक नहीं होता। दलालों के चक्कर में पड़े अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक भी मरीज को गंभीर बता पहले रेफर कर देते। फिर वही मरीज स्थानीय किसी डॉक्टर के क्लीनिक में पहुंच जाते। भारी रकम ऐंठने के बाद उसका सफल ऑपरेशन भी हो जाता है। दैनिक भास्कर द्वारा लगातार फॉलोअप में आखिरकार इस रैकेट का खुलासा हुआ। कहरा प्रखंड के मोहनपुर पंचायत के एक रिक्शा चालक राजबीर ठाकुर की पत्नी मीना देवी का सिजेरियन ऑपरेशन सदर अस्पताल में होना था। चिकित्सक की मंशा नहीं थी कि अस्पताल में इसका ऑपरेशन हो। 11 दिन तक मरीज को उलझा कर रखा गया। कार्यरत महिला चिकित्सक डॉ. प्रभा वर्मा ने ऑपरेशन करने से हाथ खड़ा कर दिया। जबकि मात्र सात हजार रुपए जमा करने के बाद उसी मरीज का शहर के बेंगहा स्थिति एक निजी नर्सिंग होम में दो घंटे में ही ऑपरेशन कर दिया। जिसे करवाने के लिए गर्भवती मीना को 11 दिन तक सदर अस्पताल के चिकित्सकों के पास चिड़ौरी करनी पड़ी। मरीज के परिजनों की लाचारी यही थी कि उसके पास पैसे नहीं थे और गरीब का अस्पताल समझ कर ही सदर अस्पताल आए। ऐसे में जिस ऑपरेशन के लिए सदर अस्पताल के कई चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर लिए। उसे जॉन्डिस का मरीज बताकर डीएमसीएच दरभंगा रेफर कर दिया गया। उस मरीज के परिजन से 7 हजार रुपए लेने के बाद बेंगहा रोड स्थित सुशीला नर्सिंग होम में सफलतापूर्वक सिजेरियन ऑपरेशन कर दिया गया। जिस निजी नर्सिंग होम में मीना का ऑपरेशन डॉ. विभा झा ने किया वह भी सरकारी अस्पताल पीएचसी में पदस्थापित हैं।

भर्ती होने के बाद मरीज को ऑपरेशन की बात कही थी
26 दिसंबर से जिले के कहरा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मोहनपुर गांव निवासी व रिक्शा चालक राजबीर ठाकुर की पत्नी दूसरी बार प्रसव पीड़ा के बाद सदर अस्पताल में भर्ती हुई थी। उनाक सिजेरियन ऑपरेशन होना था। सदर अस्पताल में नियुक्त चिकित्सक डॉ. प्रभा वर्मा ने पहले उन्हें सदर अस्पताल में ही ऑपरेशन कर देने की बात बताई। जिसके बाद वे टालमटोल करती रहीं। परिजन द्वारा लगातार दबाव दिए जाने पर निजी नर्सिंग होम जाने की सलाह दे डाली। परिजनों द्वारा इंकार किए जाने पर उन्हें जॉन्डिस का मरीज घोषित कर दिया गया। जबकि जॉन्डिस की जांच भी नहीं करवाई गई। परिजन ने निजी जांच घर जांच करवाई तो उनमें जॉन्डिस की पुष्टि नहीं हुई। जांच रिपोर्ट को लेकर 5 जनवरी को सदर अस्पताल पहुंचे परिजन को दो टूक जवाब देते डीएमसीएच दरभंगा रेफर कर दिया गया।

मरीज को आखिर में सदर अस्पताल से बाहर जाना पड़ा
सवाल उठता है कि जिस सदर अस्पताल में कुल 31 एमबीबीएस सहित सर्जन मौजूद हैं। वहां एक गरीब मरीज का मुफ्त सिजेरियन ऑपरेशन भी नहीं हो पाता है। आखिरकार आर्थिक तंगी के शिकार उस मरीज को भी सदर अस्पताल से निराश लौट दलालों के चक्कर में फंस कर कर्ज लेकर निजी नर्सिंग होम में इलाज कराना पड़ता है।

निजी क्लीनिक में पीएचसी की डॉक्टर विभा झा ने किया ऑपरेशन, जच्चा-बच्चा सुरक्षित
सिविल सर्जन डॉ. अवधेश कुमार ने भी चिकित्सकों से ऑपरेशन कर देने का आग्रह किया था। लेकिन सदर अस्पताल में नियुक्त कोई भी चिकित्सक मीना के सिजेरियन ऑपरेशन को तैयार नहीं हुए। ऐसे में मजबूरन मीना देवी को लेकर निजी नर्सिंग होम पहुंचे। जहां सरकारी ड्यूटी में नियुक्त डॉ. विभा झा ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया। हालांकि वे सदर अस्पताल में नियुक्त नहीं है। वे जिले के किसी अन्य पीएचसी में नियुक्त हैं। साथ ही स्थानीय बेंगहा स्थित निजी नर्सिंग होम में मरीजों का इलाज भी करतीं हैं।

11 दिन लगानी पड़ी चक्कर
पीड़ित राजबीर ठाकुर ने बताया कि डॉ. विभा झा ने उनकी पत्नी का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर दिया। जबकि वे 11 दिन से सदर अस्पताल का लगातार चक्कर लगाते रहे थे। लेकिन सदर अस्पताल के किसी भी चिकित्सक ने ऑपरेशन नहीं किया।

21.50 लाख रु. चिकित्सकों केे लिए निर्गत किए जाते हैं
प्रतिमाह सदर अस्पताल में नियुक्त 20 स्थाई चिकित्सकों के लिए जहां कुल 21 लाख 50 हजार 875 की राशि निर्गत होती है। वही अनुबंध पर बहाल पांच चिकित्सकों के वेतन मद में कुल 3 लाख 25 हजार एवं नवनियुक्त स्थाई 6 चिकित्सकों के मद में कुल 4 लाख 4 हजार 250 रुपए भेजी जाती है। सदर अस्पताल में नियुक्त चिकित्सक सहित स्वास्थ्य कर्मी की प्रति महीने 66 लाख 62 हजार 727 रु. सरकार से निर्गत होता है।

मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं, परेशानी नहीं
सदर अस्पताल के चिकित्सक ने मीना का ऑपरेशन क्यों नहीं किया। इसकी जानकारी वे ही दे सकते हैं। मैने सिजेरियन ऑपरेशन किया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई है।
डॉ. विभा झा

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आपकी सकारात्मक और संतुलित सोच द्वारा कुछ समय से चल रही परेशानियों का हल निकलेगा। आप एक नई ऊर्जा के साथ अपने कार्यों के प्रति ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। अगर किसी कोर्ट केस संबंधी कार्यवाही चल र...

    और पढ़ें