एक घाट से जुड़ी दो धर्मों की आस्था:सहरसा बस्ती का पोखर; यहां 80 साल से सूर्य की पूजा के साथ ईद की नमाज भी पढ़ी जाती

मनोज ठाकुर |सहरसा22 दिन पहले
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सहरसा बस्ती स्थित पोखर, जहां अभी स्थानीय लोगों के स्तर पर की जा रही साफ-सफाई। - Dainik Bhaskar
सहरसा बस्ती स्थित पोखर, जहां अभी स्थानीय लोगों के स्तर पर की जा रही साफ-सफाई।
  • शहर का इकलौता एतिहासिक पोखर जहां होता दो महापर्व
  • सामाजिक पहल: छठ के15 दिन पूर्व से मुस्लिम युवक पहरेदारी कर पोखर में गंदगी नहीं फैलाने देते

शहर के सहरसा बस्ती स्थित पोखर की ऐतिहासिक परंपरा के साथ हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल लोक आस्था के पर्व छठ में भी देखने को मिलती है। शहर का यह इकलौता पोखर है जो मुस्लिम बहुल आबादी के बीच है जहां मुस्लिम के सभी प्रमुख पर्वों में एक ईद की नमाज होती है वहीं हिन्दुओं के आस्था से जुड़े महापर्व छठ में हजारों व्रती और श्रद्धालु भी यहां भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं। ईद की नमाज और छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा लगभग 80 साल पूर्व से चली आ रही है। सहरसा बस्ती के 52 बीघा जमीन पर बनी ईदगाह और पोखर पर साल में दो बार हिन्दू और मुस्लिमों के महापर्व का बड़ा आयोजन होता है। दोनों ही पर्वों में हिंदू-मुस्लिम तहजीब की एकता और आपसी भाइचारे की मिसाल आज तक कायम है। सहरसा बस्ती निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग मो. सनोवर आलम और मो. तनवीर आलम कहते हैं कि उनके जन्म से पूर्व उक्त पोखर बना हुआ था।

दैत्य नाम से प्रसिद्ध पोखर 52 बीघा में फैला है, किनारे एक ईदगाह भी बना है
उन्होंने बताया कि उक्त पोखर दैत्य पोखर के नाम से प्रचलित है। इसे किसने बनाया और क्यों बनाया ? यह सिर्फ कहानी और किवदंती में ही दर्ज है। 52 बीघा में जहां विशाल पोखर है। वहीं पोखर के एक किनारे पर ईदगाह भी है। पोखर के बनने के बाद से ही जहां छठ पर्व पर अर्घ्य देने के लिए शहरी क्षेत्र के कई मोहल्ले के लोग पहुंचने लगे।

छठ व्रतियों को अर्घ्य देने में परेशानी न हो लोग खास तौर पर रखते ध्यान
सहरसा बस्ती निवासी युवक मो. शकील खान, मो. हैदर, मो. सरताज और मो. पप्पू चौधरी ने बताया कि छठ पर्व से 15 दिन पूर्व से ही स्थानीय मुस्लिम युवक छठ पोखर के चारों किनारे की पहरेदारी करते हैं। लोग पोखर के किनारे गंदगी नहीं फेंके, मल-मूत्र का त्याग नहीं करें। इसके लिए पहरेदारी की जाती है। वे लोगों को ऐसे कामों से रोककर घाट को साफ सुथरा रखने में सहयोग देते हैं। जिससे छठ व्रतियों को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े।

मो. शकील, मो. हैदर, मो. सरताज व मो. पप्पू कर रहे घाट की पहरेदारी।
मो. शकील, मो. हैदर, मो. सरताज व मो. पप्पू कर रहे घाट की पहरेदारी।

घाट पर स्ट्रीट लाइट व महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनाने की मांग
छठ घाट की रोशन करने के लिए मुस्लिम युवकों की कमेटी द्वारा जनरेटर लगाया जाता है। लेकिन पोखर के किनारे अवस्थित 15-20 पोल पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगा हुआ है। अगर जिला प्रशासन वहां स्ट्रीट लाइट लगा दे तो छठ व्रतियों को परेशानी नहीं होगी। इसके अलावे घाट पर महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनवाने की मांग भी है।

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