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संस्कृत संभाषण वर्ग का ऑनलाइन उद्घाटन:सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने में संस्कृत भाषा की भूमिका : मंत्री

सहरसा13 दिन पहले
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यदि हम संस्कृत भाषा का अध्ययन करते हैं तो भारतीय ज्ञान-विज्ञान में निबद्ध अन्य भारतीय भाषाओं को आसानी से जान सकेंगे। सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने में संस्कृत भाषा की महती भूमिका है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी रही है। ये बातें रविवार को संस्कृत भारती बिहार प्रान्त न्यास के तत्त्वावधान में दस दिवसीय आभासिक संस्कृत संभाषण वर्ग ऑनलाइन उद्घाटन समारोह वक्ताओं ने कही। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ.आलोक रंजन ने कहा पूरा विश्व यहां कोरोना महामारी से त्रस्त है, वहां इस विपदा के घड़ी में संस्कृत भारती बिहार के कार्यकर्ताओं द्वारा निःशुल्क संस्कृत सीखाने का जो कार्य किया जा रहा है, वह वस्तुतः प्रशंसनीय है। लोगों को इस अवसर का लाभ लेकर संस्कृत बोलने का अभ्यास करना चाहिए। मंत्री डॉ. झा ने कहा कि संस्कृत भाषा से लोगों की दूरी बढ़ने के कारण समाज में कुरीतियां बढ़ रही है।

संस्कृत संभाषण के लिए 1296 ने पंजीकरण किया
संस्कृत भारती उत्तर बिहार के संघटन मंत्री विवेक कौशिक ने कहा कि संस्कृत संभाषण के लिए बिहार के कुल 1296 लोगों ने पंजीकरण किया । सात भागों में इन सभी लोगों को विभक्त कर जिला के अनुसार सभी को अगले दस दिनों तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सात-सात शिक्षकों एवं सह शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है । वर्ग का संचालन सोमवार से अपने अपने जिला के समयानुसार संचालित होंगे । कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण एवं सरस्वती पूजन से हुई।अतिथियों का स्वागत संस्कृत भारती के प्रान्त मंत्री डॉ.रमेश कुमार झा ने किया। ध्येय मंत्र भारतीश्री एवं विद्यासागर झा ने किया। एकलगीत प्रशान्त कुमार झा ने प्रस्तुत किया।

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