लौटे प्रवासी मजदूर:10 दिन से काम नहीं मिल रहा था, कमाई की थोड़ी पूंजी बची थी

सहरसा6 महीने पहले
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  • डर, चिंता व मुट्ठी भर की कमाई को लेकर वापस लौटे प्रवासी

दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में मजदूरों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। न तो उन्हें कोई काम ही दिया जा रहा है, न ही रहने-खाने के लिए कोई मदद भी दी जा रही है। 10 दिनों से गुड़गांव में कोई काम नहीं मिल पा रहा था। वे लोग 50 दिन से कमाई पूंजी में से आधे से अधिक पूंजी आने-जाने व रहने-खाने में खर्च कर दिए। 50 दिन की कमाई में से अब उनके पास मात्र 5 से 10 हजार रुपए ही बचे थे तो वे लोग वापस घर लौट रहे हैं। अब दिल्ली नहीं जाएंगे। घर में ही रहकर पत्नी और बाल-बच्चे के साथ रूखी-सूखी रोटी खाकर ही जिंदगी बिता लेंगे। आक्रोशपूर्ण ये शब्द निकल रहे हैं हरियाणा के गुड़गांव से लौटे 17 मजदूरों की टोली के मुखिया अर्जुन ऋषि देव, प्रमोद ऋषि देव सहित अन्य लोगों के। गुरुवार को स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पटना से राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेन से पहुंचे मजदूरों की टोली को मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड के रजनी गांव जाना था। सभी एकजुट रेलवे स्टेशन पर बैठे बस की तलाश कर रहे थे। वे स्टेशन पर बीते 50 दिनों की अपनी कमाई और खर्च का लेखा-जोखा करते दिखा रहे थे। साथ ही 50 दिनों के डर, चिंता और मुट्ठी भर की कमाई को लेकर लौटने के बावजूद भी सहरसा पहुंचकर संतोष जता रहे थे। मजदूर अर्जुन ऋषि देव ने बताया कि 50 दिन पूर्व मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत रजनी गांव सहित आसपास के गांव से 17 आदमी की टोली हरियाणा के गुड़गांव गेहूं कटाई के लिए पहुंचे थे। वे लोग ट्रेन से डेढ़ हजार रुपए के खर्च में गुड़गांव पहुंच गए थे। 10 दिनों से उन्हें कोई काम नहीं मिल पा रहा था।

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