गमगीन हुआ सहरसा:UP के बाराबंकी हादसे में मारे गए 2 युवकों के शव घर पहुंचे; परिजनों की चीख-पुकार सुन गांव वाले भी नहीं रोक सके आंसू

सहरसाएक वर्ष पहले
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शव पहुंचने के बाद मृतक की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। - Dainik Bhaskar
शव पहुंचने के बाद मृतक की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में मंगलवार देर रात हुए सड़क हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। सहरसा के सोनबरसा राज में गुरुवार को 2 मृतकों के शव आने से जसलीमा गांव में मातम पसर गया। परिजनों की चीख-पुकार से लोगों की आंखें नम हो गई हैं। पूरे गांव में कोहराम मच गया है। विराटपुर पंचायत स्थित जलसीमा गांव में गुरुवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी कैलाशपति मिश्र ने परिजनों को शव सौंप दिया। इस हादसे में अभी भी 23 लोग घायल हैं, जिसमें 7 की स्थिति गंभीर है। CM नीतीश कुमार ने मृतकों को 2-2 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया था।

मृतक अखिलेश मुखिया के पिता सुकल मुखिया ने बताया कि बुधवार को फोन से जानकारी मिली कि बेटे की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई है। उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। अब इनका पालन पोषण कैसे होगा? पड़ोस के सिकेन मुखिया की पत्नी की चीख-पुकार से लोग आंसू नहीं रोक पाए।

गांव में उमड़ी भीड़।
गांव में उमड़ी भीड़।

मौके पर पहुंची लोजपा नेत्री सरिता पासवान ने बताया कि रोजगार के आभाव में यहां से युवक अन्य प्रांत में कमाने जाते हैं। अगर रोजगार यहीं मिल जाए तो बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। BDO कैलाशपति मिश्र ने बताया कि सरकार के निर्देश पर मुजफ्फरपुर से लाश प्राप्त कर विराटपुर पंचायत स्थित जलसीमा गांव में परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों को समुचित मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शीघ्र मुआवजे की राशि सौंप दी जाएगी।

किसी की आंखें थम नहीं पाईं। सभी रो पड़े।
किसी की आंखें थम नहीं पाईं। सभी रो पड़े।

इधर, बेटे की मौत से इस परिवार व उसके मासूम बच्चों के सामने जीवनयापन की समस्या उत्पन्न हो गई है। सभी की जुबान पर एक ही बात है कि अब इस परिवार का जीवनयापन कैसे होगा। हर साल कोसी क्षेत्र से अन्य प्रान्त रोजगार की तलाश में जाने वाले दर्जनों मजदूर किसी न किसी दुर्घटना के शिकार हो अपनी जान गंवाते हैं। ऐसे में सभी की जुबान पर एक ही बात थी कि काश! यहां रोजगार उपलब्ध होता तो दूसरे रोजगार के लिए राज्य जाना नहीं पड़ता और असामयिक मौत का शिकार नहीं बनना पड़ता।

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