आस्था:अखंड सौभाग्य की कामना के साथ नवविवाहिताएं कर रहीं मधुश्रावणी व्रत

सहरसा2 महीने पहले
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गौरी-शंकर पूजन के लिए फूल जमा करतीं नवविवाहिता। - Dainik Bhaskar
गौरी-शंकर पूजन के लिए फूल जमा करतीं नवविवाहिता।
  • गौरी-शंकर की पूजा-आराधना व मैथिली लोकगीतों से उत्साह

मिथिला क्षेत्र के नव विवाहिताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 14 दिवसीय पर्व मधुश्रावणी के अवसर पर चलने वाले गौरी-शंकर की पूजा-आराधना व मैथिली लोकगीतों के झंकार से वातावरण गुंजायमान है। नवविवाहिताएं अलौकिक उत्साह से भरी हुई नियम-निष्ठा पूर्वक साधनारत हैं। मिथिला में नवविवाहिताएं यह पर्व अत्यंत नियम-निष्ठा पूर्वक तो करती ही हैं,साथ ही इस पर्व की अन्य विशेषताओं को भी सहर्ष स्वीकार करते हुए गौरी-गणेश व आशुतोष शिव से अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।मधुश्रावणी को लेकर नवविवाहित की ओर से सोलहों श्रृंगार कर फूल लोढ़ने के लिए जाते वक्त का दृश्य अत्यंत ही मनमोहक होता है, इसी लोढ़े हुए बासी फूल से अगले दिन वे देवी-देवताओं की पूजा करतीं हैं, ततपश्चात महिला पुरोहित से शिव-पार्वती के चरित्र की की कथा का नित्य श्रवण करतीं हैं,बिना नमक का भोजन व भूमिशयन को अपने दिनचर्या में शामिल कर व्रत के नियमों का पालन करती हैं।वहीं इस पूजा के प्रथम व अंतिम दिन समाज मे नवविवाहिताएं अंकुरित चना को प्रसाद रूप में भी वितरित करती हैं। पन्द्रह दिनों तक समान रूप से चलने वाले पूजा-पाठ व नियम कर्मों का पालन श्रद्धा पूर्वक करते हुए नवविवाहिताएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं वहीं अपने लिए अखंड सौभाग्य का वरदान भी शिव-पार्वती से मांगती हैं।

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