शारदीय नवरात्र शुरू:नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा, आज माता ब्रह्मचारिणी की आराधना

सहरसा16 दिन पहले
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सिमरीबख्तियारपुर में कलश स्थापना। - Dainik Bhaskar
सिमरीबख्तियारपुर में कलश स्थापना।

शारदीय नवरात्र के शुरू होते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सबेरे होने से लोग प्रात: काल से ही पूजन में जुट गए। नवरात्रा के पहले दिन गुरुवार को माता के 9 स्वरूपों में एक शैलपुत्री का पूजन किया गया। आज लोग माता के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजन का पूजन करेंगे। शहर के कचहरी रेलवे स्टेशन के पूर्वी भाग में स्थित दुर्गा मंदिर परिसर को अच्छी तरह साफ-सफाई कर चारों ओर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर दिया गया है। तीन पंडितों के द्वारा दुर्गशप्तशती का पाठ चल रहा है। कचहरी रेलवे स्टेशन के पूर्वी भाग में अवस्थित दुर्गा मंदिर मेंं वर्ष 1992 से ही मिथिला पद्धति के अनुसार दुर्गा पूजा का आयोजन होता है। यहां सामान्य रूप से नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के वैष्णवी स्वरूप की उपासना की जाती है। मंदिर में बलि नहीं दी जाती है। निशा पूजा के दिन भी किसी प्रकार की बलि नहीं चढ़ाई जाती है। पहले वहां पर एक टीना के घर में मिट्‌टी की प्रतिमा स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती थी। प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मदन कुमार सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष हीरा प्रभाकर, कोषाध्यक्ष मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि चार साल तक टीना के घर में माता की पूजा-अर्चना हुई। कोलकाता के मूर्तिकार भानू घोष प्रत्येक वर्ष यहां आकर मिट्टी की भव्य प्रतिमा बनाते थे। लेकिन वर्ष 1996 में जन सहयोग से मंदिर का निर्माण करवाया और राजस्थान से संगमरमर की मूर्ति मंगवा कर स्थापित की गई।

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कचहरी दुर्गास्थान में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के वैष्णवी स्वरूप की होती उपासना, मंदिर में नहीं चढ़ाई जाती बलि

सिमरी द्वारिका में 151 कन्याओं ने निकाली कलश शोभायात्रा।
सिमरी द्वारिका में 151 कन्याओं ने निकाली कलश शोभायात्रा।

151 कन्याओं के द्वारा निकाली गई कलश शोभायात्रा
सिमरीबख्तियारपुर |
नगर परिषद के सिमरी द्वारिका टोला में गुरुवार को सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ से पूर्व 151 कन्याओं के द्वारा कलश शोभायात्रा निकाल कर शुभारंभ किया गया। कलश पूजन यात्रा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वृंदावन से आए कथावाचक पवनदेव जी महाराज के सान्निध्य में किया गया। यह कलश यात्रा तिलावे नदी से कलश में जल भरकर सिमरी बाजार, हिंदूपुर होते हुए पुनः यज्ञ स्थल पर पहुंची। यजमान के रूप में लक्ष्मीकांत शर्मा श्रीमद् भागवत कथा पुस्तक को अपने सिर पर रख कर चल रहे थे। संध्या में श्री पवनदेव जी महाराज वृंदावन से आएं अपनी टीम के साथ भक्तिमई कथा वाचन एवं गीत संगीत के माध्यम से शुभारंभ किया। मौके पर चंदन शर्मा, अरविंद यादव खुशीलाल दास, डोमी पोद्दार, दुःखी बढ़ई, सुखदेव बढ़ई, संदेश शर्मा, शोमी यादव, प्रदीप यादव, संजय यादव, रविन्द्र पोद्दार, मनोज पोद्दार, राजेंद्र शर्मा, गरकन, इंदल पोद्दार, अजय पोद्दार, धनश्याम , जितेंद्र बढ़ई, पप्पू, दीपक, कुन्दन, रामू, योगदान दे रहे हैं।

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