आस्था:ढेंगरी दुर्गा मंदिर भक्तों के लिए मनोकामना सिद्ध पीठ से कम नहीं

सिकटी18 दिन पहले
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  • महाअष्टमी की रात निशा पूजा व सांस्कृतिक कार्यक्र का होता है आयोजन, बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु

शारदीय नवरात्र गुरुवार को कलश स्थापना के साथ शुरू हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाली इस नवरात्र में सिकटी प्रखंड के विभिन्न दुर्गा मंदिरों दुर्गा पूजा के साथ-साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा रहा है। वहीं सिकटी प्रखंड के ढेंगरी गांव स्थित अति प्राचीन देवी दुर्गा मंदिर किसी सिद्ध पीठ से कम नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर की स्थापना वर्तमान पुजारी त्रिपित नाथ ठाकुर के पूर्वज जो तत्कालीन फड़किया स्टेट के पुजारी थे, उसके के द्वारा 1860 ई. में की गई थी। मुरारी ठाकुर के वंशजों को पूजा करने के लिए यह मंदिर उपहार में प्रदान किया था। उस समय उन्हे वहां से प्राप्त अष्टधातु से निर्मित देवी की प्रतिमा, काले ग्रेनाइड पत्थर एवं तांबे के बर्तन तथा एक खड़ग जो आज भी अवशेष के रूप में मौजूद है, लेकर यहां आए मुरारी ठाकुर के पूर्वजों ने इस मंदिर की स्थापना अपने सगे संबंधी मामा बिरनी झा के संरक्षण एवं सहयोग से किया जो कच्चे घर में स्थापित हुआ था। बाद में समस्त ग्रामीणों का काफी सहयोग प्राप्त हुआ।

अलग है इस मंदिर का पूजा विधान
पंडित वंशीधर ठाकुर का कहना है कि कलस्थापन के साथ अलग पद्धति से वर्षो से पूजा होती आ रही है। षष्ठी तिथी को जुड़वा बेल का सायंकालीन पूजन कर बिल्वाभिमंत्रण किया जाता है। फिर सप्तमी तिथि को सुबह पूजन कर जुड़वा बेल तोड़कर उसे देवी का स्वरुप मानकर पालकी पर मंदिर प्रवेश कराया जाता है। फिर पूजन के बाद उजले रंग की छागर की बलि दी जाती है। अष्टमी की रात निशा पूजा का आयोजन होता है। जो इस इलाके के लिए सबसे प्रसिद्ध पूजा मानी जाती है। पूरी रात माता का भजन कीर्तन कर जागरण होता है। पूजा के उपरांत देर रात्रि काले रंग की छागर बलि दी जाती है। पूरा गांव सहित आसपास के हजारों श्रद्धालु इस रात मंदिर में माथा टेकने आते हैं। नवमी के दिन करीब चार पांच सौ छागरों की बलि दी जाती है।

क्या कहते हैं पुजारी
इस मंदिर में दुर्गा पुजा करने के साथ सालों भर मंदिर की पूजा करने वाले त्रिपितनाथ ठाकुर ने बताया कि इस महापूजा को संपन्न करने में उन्हे देवी की असीम कृपा मिलती है तब ही वो कर पाते हैं। पूर्वजों के धरोहर की सेवा करते ताउम्र माता की पूजा करने की इच्छा है। जब तक माता की कृपा रहेगी सदैव पूजन करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस मंदिर की आस्था का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि सालो भर मुसीबत में फंसे लोगों को यहां आकर मदद मिलती है जिसके वो साक्षी हैं। आये दिन लोग मंदिर आकर उसके पूजा के फूल को प्रसाद स्वरुप मांगकर समस्या का निदान पाते है। ढेंगरी दुर्गा मंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष मधुसूदन झा के मुताबिक पूर्वजों के धरोहर इस मंदिर की पूजा व्यवस्था मंदिर की संम्पत्ति से होता है।पक्के भवन निर्माण में सबो के सहयोग मिले है।ग्रामीणों के आस्था एवं सहयोग से ही दिनों दिन मन्दिर में दुर्गा पूजा बेहतर ढंग से सम्पन्न होता है।

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