विडंबना तो देखिए:मध्य विद्यालय दुधैला में 793 छात्रों पर महज चार और तिलकपुर में 445 पर सात शिक्षक

सुल्तानगंज2 महीने पहलेलेखक: रविन्द्रनाथ कुमार
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तिलकपुर में एक बेंच पर 5 बच्चे बैठ करते हैं पढ़ाई। जगह न होने पर बच्चे दरी पर बैठते हैं। - Dainik Bhaskar
तिलकपुर में एक बेंच पर 5 बच्चे बैठ करते हैं पढ़ाई। जगह न होने पर बच्चे दरी पर बैठते हैं।

प्रखंड के कुल 162 सरकारी स्कूलों में 78 प्राइमरी व 84 मिडिल स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में कक्षा एक से 8 तक में लगभग 43 हजार बच्चों को पढ़ाने के लिए 843 शिक्षक (अक्टूबर तक का रिकॉर्ड) प्रतिनियुक्त किए गए हैं। जो 51:1 है। जबकि मानक के अनुसार 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। शिक्षकों की कमी एवं जर्जर कमरों की समस्या से जूझ रहे कई स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

लिहाजा संबंधित स्कूलों के एचएम जर्जर कमरे में ही बच्चों को ठूंस-ठूंसकर पढ़ाने को विवश हैं। इसकी बानगी तिलकपुर कन्या मिडिल स्कूल और नगर परिषद के वार्ड 18 में संचालित मध्य विद्यालय दुधैला में देखी जा सकती है। देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी शेरे बिहार बाबू सियाराम सिंह की जन्मस्थली तिलकपुर में 1950 में कन्या मिडिल स्कूल की स्थापना की गई थी।

यहां 445 बच्चों को पढ़ाने के लिए एचएम सहित महज 7 शिक्षक हैं। इस स्कूल के बच्चे 70 साल पहले निर्मित 10 जर्जर कमरों में पढ़ रहे हैं। स्कूल की अपनी 94 डिसमिल जमीन उपलब्ध है। एचएम अखिलेश कुमार ने बताया कि जर्जर कमरे और शिक्षकों की कमी की समस्या से विभाग को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है। बारिश के मौसम में सभी कमरों की छत से पानी टपकता है। बावजूद अब तक इन समस्याओं के निदान के लिए विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।

जर्जर अवस्था में स्कूल का कमरा।
जर्जर अवस्था में स्कूल का कमरा।

प्रधानाध्यापकों ने कहा-समस्या के समाधान के लिए विभाग को भेजा है पत्र

मध्य विद्यालय दुधैला में विज्ञान विषय के एक भी शिक्षक नहीं

नगर परिषद के वार्ड 18 स्थित मिडिल स्कूल दुधैला में कक्षा एक से आठ तक में कुल 793 बच्चे नामांकित हैं। इनको पढ़ाने के लिए एचएम सहित महज चार शिक्षक ही उपलब्ध हैं। इससे पहले यहां 6 शिक्षक प्रतिनियुक्त थे। जिसमें विज्ञान के शिक्षक शैलेन्द्र कुमार झा की कोरोना की दूसरी लहर में मौत हो चुकी है। जबकि निर्मल कुमार निर्मल कुछ माह पहले रिटायर हो गए।

वर्तमान में इस स्कूल में एचएम राजीव कुमार सहित सहायक शिक्षिका प्रेमलता कुमारी, शिक्षक शैलेन्द्र कुमार और फिजिकल शिक्षक धनंजय प्रसाद यादव प्रतिनियुक्त हैं। जिन पर रोजाना औसतन 500 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। एचएम ने बताया कि 10 कमरों में चार पूरी तरह से जर्जर हो चुके है।

6 कमरों में ही 500 बच्चों को चार शिक्षकों के भरोसे शिक्षा दी जा रही है। विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं रहने से बच्चों को काफी दिक्कत हो रही है। स्कूल के पास जमीन भी कम हैं। लिहाजा, जर्जर कमरों को तोड़कर ही नया भवन बनाया जा सकता है। इसके लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।

15 दिसंबर के बाद स्कूलों में होगी शिक्षकों की नियुक्ति
शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया 15 दिसंबर के बाद शुरू हो रही है। इसके बाद संबंधित स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति कर दिया जाएगा। जिले के जिन स्कूलों के भवन जर्जर हैं, वहां के बीईओ से रिपोर्ट मंगाकर पटना भेजी गई है। विभाग से निर्देश आने के बाद संबंधित स्कूलों के भवन का निमार्ण कराया जाएागा।- संजय कुमार, डीईओ, भागलपुर

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