गड़बड़झाला:कर्मियों का आरोप-हर बात में झगड़ते रहते हैं प्रभारी जवाब-साजिश के तहत ही कर्मी कर रहे हमें परेशान

शंकरपुर2 महीने पहले
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शंकरपुर पीएचसी में प्रभारी के खिलाफ प्रदर्शन करते कर्मी। - Dainik Bhaskar
शंकरपुर पीएचसी में प्रभारी के खिलाफ प्रदर्शन करते कर्मी।
  • कर्मियों ने डीएम से की पीएचसी प्रभारी को हटाने की मांग, पूर्व में भी सीएस से की थी शिकायत
  • शंकरपुर पीएचसी में बढ़ रहा तनाव, प्रभारी के खिलाफ खोला मोर्चा

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शंकरपुर की स्थिति ठीक नहीं है। यहां एक ओर पीएचसी प्रभारी डॉ. विमल हैं, तो दूसरी ओर कई चिकित्सक, कार्यालय कर्मी और एएनएम हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। चिकित्सक एवं अन्य कर्मियों ने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पर मानसिक, शारीरीक एवं आर्थिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। इस बावत दंत चिकित्सक डाॅ. संगीता कुमारी, बीसीएम राजीव कुमार, स्थापना लिपिक चंदन कुमार, एएनएम स्वर्णलता, पूनम, पवन सहित सभी विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने डीएम, सिविल सर्जन एवं आरडीडी को दिए लिखित आवेदन में कहा है कि डाॅ. विमल कुमार जब से शंकरपुर पीएचसी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में प्रभार लिए हैं, उसी समय से यहां के लगभग सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों से लड़ते-झगड़ते रहते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इनका मानसिक स्थिति ठीक नहीं हैं। जो एक पदाधिकारी के लिए जांच का विषय हैं। वे अधिकांश समय पीएचसी से बाहर रहते हैं। आते ही उपस्थित सभी कर्मी से बदसलूकी करने लगते हैं।

बीमार रहने पर भी नहीं मिलता आकस्मिक अवकाश
एएनएम सपना कुमारी ने बताया कि बीमार रहने के बावजूद भी आकस्मिक अवकाश नहीं दिया जाता है। वहीं कई एएनएम ने कहा कि कोरोना काल में लिए गए ड्यूटी का वेतन नहीं मिला है। जिसकी शिकायत सिविल सर्जन से भी की गई थी। एक सप्ताह का समय लिया गया, लेकिन तीन माह बीतने के बावजूद भी वेतन नहीं दिया गया। कार्यरत ममता ने कहा कि पिछले छह माह से प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई है। दशहरा, दीपावली, छठ पर्व बीत जाने पर भी राशि नहीं दी गई। कहने पर टाल मटोल कर ड्यूटी से हटाने की बात कहते हैं। इन सभी समस्याओं को लेकर पीएचसी कर्मी ने अस्पताल परिसर में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के विरुद्ध वापस जाओ का नारे लगाए। साथ ही काला बिल्ला लगाकर काम करने का निर्णय लिया।

डेढ़ माह पूर्व भी एएनएम ने खोला था मोर्चा
पीएचसी प्रभारी के खिलाफ डेढ़ माह पूर्व भी एएनएम ने कई तरह के गंभीर आरोप लगाकर सीएस को आवेदन दिया था। एएनएम स्वर्णलता कुमारी, कृतिका, तनुजा, विभा, रीना, गुंजा, संजू, पूनम, पुष्पलता, निर्मला, बबीता, उर्वशी, सुशीला, मंजू, रीना, वीणा, रीता, सपना, किरण, वृन्दा, नूतन आदि का आरोप था कि पीएचसी प्रभारी डॉ. विमल कुमार उनलोगों से हर बात पर घूस मांगते हैं। इनलोगों का कहना है कि अस्पताल में उनलोगों के रेस्ट रूम में कैमरा लगा दिया गया है। मरीज नहीं रहने की स्थिति में पर ये लोग रेस्ट करते हैं, तो कैमरा से रिकार्डिग को अपने मोबाइल पर हमलोगों को ऑनलाइन सोए अवस्था में देखते रहते हैं। इनलोगों ने कहा था कि डॉ. विमल इससे पूर्व, चौसा सीएचसी के प्रभारी बनाए गए थे। वहां भी इनकी स्थिति इसी तरह की थी। दोनों ही बार चार-चार महीना में उन्हें वहां से हटा दिया गया।

जाति के आधार पर कर्मी कर रहे दुर्व्यहार : डॉ. विमल

दूसरी ओर, पीएचसी प्रभारी डॉ. विमल कुमार ने कहा कि उनके साथ यहां कर्मी जातिगत आधार पर दुर्व्यहार करते हैं। साजिश के तहत उन्हें सभी कर्मी मिलकर परेशान करते हैं। ममता एवं एएनएम के मानदेय के बारे में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें कुछ भी पता नहीं है कि वेतन कब मिलता है और कौन देता है। उन्होंने कहा कि वे रोस्टर के अनुसार ड्यूटी करते हैं। बावजूद यहां के कुछ कर्मी जान से मारने के नीयत से मारपीट करने पर उतारू हो गए हैं। दूसरी ओर, पीड़ित दंत चिकित्सक डॉ. संगीता कुमारी ने बताया कि मानक के अनुसार ओपीडी में इलाज के लिए एक भी चेयर एवं उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। शिकायत करने पर प्रभारी के द्वारा भद्दी-भद्दी भाषा का प्रयोग कर धमकाया जाता है। निम्नवर्गीय लिपिक सह स्थापना प्रभारी चंदन कुमार ने बताया कि चिकित्सा पदाधिकारी का पद सम्मानित है, उनका आदर करते हैं। लेकिन वे किसी भी बात में बार-बार मानसिक संतुलन खो देते हैं।

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