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खुशखबरी:अक्टूबर तक दरभंगा के लिए रेल महासेतु पर दौड़ेगी ट्रेन, 276 किमी कम होगी दूरी

सुपौल4 महीने पहले
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सुपौल-सरायगढ़ और आसनपुर कुपहा के बीच बना कोसी महासेतु।
  • 6 जून 2003 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था शिलान्यास
  • दरभंगा जाने के लिए पहले थी 298 किमी दूरी, अब होगी 22 किलोमीटर
  • 15 अगस्त तक सहरसा से आसनपुर कुपहा के लिए रेल परिचालन संभव

उत्तर बिहार के दूरस्थ क्षेत्र के आमलोगों का करीब 90 वर्ष पुराना सपना सच करने की ओर पूर्व मध्य रेल तेज़ी से अग्रसर है। सहरसा से सरायगढ़ के रास्ते दरभंगा तक दो चरणों में ट्रेन चलाने की योजना है। जिसमें प्रथम चरण में सहरसा से सरायगढ़ के रास्ते आसनपुर कुपहा तक 15 अगस्त तक ट्रेन चलाने की योजना है। जबकि दूसरे चरण में आसनपुर कुपहा से दरभंगा तक अक्टूबर 2020 तक ट्रेन चलाने की योजना है। इसे लेकर सरायगढ़-भपटियाही एवं कुपहा हॉल्ट के बीच नवनिर्मित कोसी महासेतु पर ट्रेन का सफलतापूर्वक ट्रायल किया गया है।     निर्मली से सरायगढ़ तक का सफर वर्तमान में दरभंगा-समस्तीपुर-खगड़िया-मानसी-सहरसा होते हुए 298 किलोमीटर का है। इस पुल के निर्माण से 298 किलोमीटर की दूरी मात्र 22 किलोमीटर में सिमट जाएगी। यह जानकारी पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी राजेश कुमार ने मंगलवार को दी। उन्होंने बताया कि करीब 1.9 किलोमीटर लंबे नए कोसी महासेतु सहित 22 किलोमीटर लंबे निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड का निर्माण वर्ष 2003-04 में 323.41 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत की गई थी। इसके बाद 6 जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा पुल का शिलान्यास किया गया था। इस परियोजना की अपटूडेट अनुमानित लागत 516.02 करोड़ रुपए है। बीते 23 जून को इस नवनिर्मित रेल पुल पर पहली बार ट्रेन का सफलता पूर्वक परिचालन किया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूर्व मध्य रेल सभी स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए लगातार कार्यरत है। जल्द ही कार्य पूरा कर कोसी महासेतु सहित निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया जाएगा।

निर्मली और सरायगढ़ के बीच हुआ पुल का निर्माण
सीपीआरओ ने बताया कि कोसी नदी नेपाल के बराह क्षेत्र, कुसहा एवं चतरा से होते हुए बिहार की सीमा पर सुपौल जिले के भीमनगर आती है। अपने प्रवाह का मार्ग परिवर्तित करने में कोसी का कोई जोड़ नहीं है। बिहार में कोसी नदी की धाराओं का विस्थापन पिछले 100 वर्षों में करीब 150 किलोमीटर के दायरे में होता रहा है। कोसी नदी के दोनों किनारे को जोड़ने में यह एक बहुत बड़ी रुकावट थी। वर्तमान पुल का निर्माण निर्मली एवं सरायगढ़ के बीच किया गया है। निर्मली जहां दरभंगा-सकरी-झंझारपुर मीटर गेज लाइन पर अवस्थित एक टर्मिनल स्टेशन था। वहीं सरायगढ़, सहरसा और फारबिसगंज मीटर गेज रेलखंड पर अवस्थित था। वर्ष 1887 में बंगाल नॉर्थ-वेस्ट रेलवे ने निर्मली और सरायगढ़ (भपटियाही) के बीच मीटर गेज का निर्माण किया था। उस समय कोसी की एक सहायक नदी तिलयुगा इन स्टेशनों के मध्य बहती थी। जिस पर करीब 250 फीट लंबा पुल था। 

तटबंधों और बैराज निर्माण से साकार हुई पुल की परियोजना 
कोसी की धाराओं को नियंत्रित करने का सफल प्रयास पश्चिमी और पूर्वी तटबंध एवं बैराज निर्माण के साथ 1955 में आरंभ हुआ। पूर्वी और पश्चिमी छोर पर 120 किलोमीटर का तटबंध 1959 में पूरा कर लिया गया और 1963 में भीमनगर में बैराज का निर्माण भी पूरा कर लिया गया। इन तटबंधों एवं बैराज ने कोसी नदी के अनियंत्रित विस्थापन को संयमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिसके नदी पर पुल बनाने की परियोजना सकार रूप ले सकी।

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