आस्था:चैती नवरात्र आज से, छठ को लेकर 16 को नहाय-खाय

खगड़िया8 महीने पहले
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हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में कुल चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। जिसमें शारदीय व चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। उसके बाद चैत्र नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं को इंतजार रहता है। इस साल 13 अप्रैल यानि आज मंगलवार से चैती नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। हालांकि इस दफे एक बार फिर जिले में कोविड-19 संक्रमण का प्रभाव बढ़ते देख लोग आयोजन के स्वरूप को लेकर आशंकित हैं। बावजूद चैत्र नवरात्र को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है। पंडित सुबोध झा ने बताया कि इस माह 13 अप्रैल को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ चैती नवरात्र अनुष्ठान शुरू होकर 21 अप्रैल तक चलेगा। नवरात्र में सुबह उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करके लाल या सफेद रंग का कपड़े पर चावल रखकर मिट्टी के बर्तन में जौ बोना चाहिए। जौ बोये हुए स्थान या बर्तन के ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापना करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हालांकि इस दफे 12 अप्रैल को प्रातः 8 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल को प्रातः 10 बजकर 16 मिनट तक चैत्र प्रतिपदा रहेगी। कलश स्थापना 13 अप्रैल को प्रातः 5:45 बजे से प्रातः 9:59 तक और अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11:41 से 12:32 के बीच की जा सकती है।

16 अप्रैल को खरना, 17 को शाम और 18 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
चैत्र नवरात्रि के साथ ही चैती छठ महानुष्ठान 16 अप्रैल को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। पंडित के अनुसार इस वर्ष चैत्र छठ का नहाय खाय 16 अप्रैल को, खरना 17 अप्रैल, संध्या अर्घ 18 अप्रैल को व सुबह का अर्घ के साथ चैत्र छठ का समापन होगा। 13 अप्रैल को कलश स्थापना, 14 को मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप ब्रह्मचारिणी, 15 अप्रैल को चंद्रघंटा,16 को कुष्मांडा,17 को स्कंदमाता, 18 को कात्यायनी, 19 को कालरात्रि सह रात्री में निशा पूजा, 20 अप्रैल को महाष्टमी, 21 को राम नवमी व महानवमी व्रत और 22 अप्रैल को विजय दशमी के साथ ही पूजा के बाद विसर्जन होगा। छठ को लेकर छठ घाटों की सफाई का काम एक दो दिनो में शुरू होगा। हालांकि, इस दफे छठ घाटों पर शायद ही अर्घ्यदान की श्रद्धालुओं को पूरी आजादी मिल सकेगी।

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