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  • If The Electricity Department Had Removed The Wire, Then The Lives Of The Soldiers Would Not Have Been Lost, The Injured Soldiers Also Got The Ambulance 4 Hours Late.

अनदेखी का नतीजा:बिजली विभाग अगर तार हटा देता तो नहीं जाती जवानों की जान, घायल जवानों को एंबुलेंस भी 4 घंटे देरी से मिली

वीरपुर /भीमनगर (सुपौल)6 दिन पहले
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घायल जवानों को रेफर करने के दौरान बाहर से मंगाई गई एंबुलेंस। - Dainik Bhaskar
घायल जवानों को रेफर करने के दौरान बाहर से मंगाई गई एंबुलेंस।
  • जवानों की मौत मामले में पहले बिजली फिर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने
  • वीरपुर स्थित एसएसबी 45वीं बटालियन मुख्यालय में तंबू हटाने के दौरान 3 जवानों की मौत, 11 जवान जख्मी

वीरपुर स्थित एसएसबी 45वीं बटालियन मुख्यालय में तीन जवानों की मौत मामले में पहले बिजली विभाग और फिर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। अगर बिजली विभाग 11000 वोल्ट का तार हटा देता तो आज तीन जवानों की जान नहीं जाती। विभाग की लापरवाही से तंबू हटाने के दौरान तीन जवानों की करंट लगने से मौत हो गई और 11 घायल हो गए। उधर, जब घायलों को अस्पताल ले जाया गया तो वहां से घायल जवानों को रेफर करने के लिए चार घंटे बाद एंबुलेंस मिली। घायलों को अपहर समाहर्ता के पहुंचने के बाद एंबुलेंस मिली। सिविल सर्जन डॉ. इन्द्रजीत प्रसाद ने कहा कि वीरपुर अनुमंडलीय अस्पताल को अपना एक ही एंबुलेंस है। वह भी खराब पड़ा है। मेरे हिसाब से एंबुलेंस मिलने में देरी नही हुई। आरडीओ बसंतपुर मनीष भारद्वाज ने कहा कि एसएसबी का मामला था। उनके पास एक एंबुलेंस थी। इसलिए कुछ घंटों में ही सभी जख्मियों को हायर सेंटर भेजा जा सका। अगर आम जन के साथ यह घटना हुई होती तो वीरपुर के एंबुलेंस की व्यवस्था के कारण और देरी हो सकती थी। उधर, जिस हाईटेंशन तार की वजह से वजह से यह हादसा हुआ, उसे हटाने के लिए एसएसबी ने कई बार विद्युत आपूर्ति विभाग को पत्र लिखा था। लेकिन बिजली विभाग ने तार नहीं हटाया। वीरपुर स्थित विद्युत विभाग के सहायक अभियंता आशुतोष कुमार शर्मा ने कहा कि एसएसबी के पत्र का जवाब भी दे दिया गया था और ऐसा कहीं प्रोविजन नहीं है कि 11000 हजार के तार को हटाकर दूसरी जगह स्थापित किया जाए। पत्र के जवाब में कहा गया था कि इस तार को भूमिगत किया जा सकता है, लेकिन उस पर एसएसबी के पदाधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया और इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई।

अपर समाहर्ता के आने के बाद घायल जवानों को मिली एंबुलेंस

एसएसबी 45वीं वाहिनी मुख्यालय वीरपुर में बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की कमी से जवानों को जूझना पड़ा। 4 घंटे विलंब से अस्पताल पहुंचे अपर समाहर्ता सुपौल विदुभूषण चौधरी के हस्तक्षेप के बाद सभी घायलों को एंबुलेंस मुहैया हो सका। इसके बाद सभी घायलों को डीएमसीएच एवं अन्य अस्पतालों को रेफर किया जा सका। जन कल्याण समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार खेड़वार व उपाध्यक्ष गोपीकृष्ण राय ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि वीरपुर में इतने बड़े अनुमंडल स्तर के अस्पताल होने के बावजूद यहां एक एंबुलेंस तक का नहीं होना स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रहा है।

जांच का विषय : यह लापरवाही या दुर्घटना
घटना को लेकर अपर समाहर्ता सुपौल विदु भूषण चौधरी ने कहा कि यह घटना काफी दुखद है। हाईटेंशन वायर की चपेट में आने से 3 जवान की मौत हो गई है और 11 जवान घायल हैं। इसमें 9 को डीएमसीएच एवं दो को बथनाहा अस्पताल शिफ्ट किया गया है। विद्युत विभाग की लापरवाही के सवाल पर उन्होंने बताया कि यह जांच का विषय है कि यह लापरवाही विद्युत विभाग की है या दुर्घटना।

जवान अमोल पाटिल की मौत के बाद रोती-बिलखती पत्नी।
जवान अमोल पाटिल की मौत के बाद रोती-बिलखती पत्नी।

शहीद अमोल पाटिल वीरपुर में कमरा लेकर रहते थे, 4 माह की है बेटी

भीमनगर| एसएसबी 45वीं बटालियन मुख्यालय में शुक्रवार को हुए हादसे में शहीद जवान अमोल पाटिल महाराष्ट्र के रहने वाले थे। जो एसएसबी 45बटालियन के वीरपुर में पदस्थापित थे। वे अपने परिवार के साथ निजी रूम लेकर वीरपुर में रह रहे थे। अमोल पाटिल अपने पीछे पत्नी के साथ चार माह का बेटी को छोड़ गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की मां बार-बार बेसुध हो रही है। घटना के बाद पहुंचे परिजन भी कुछ बोलने की हालत नहीं थे।

अनुमंडल अस्पताल पुलिस छावनी में रहा तब्दील
उधर, घटना की सूचना मिलते ही अनुमंडलीय अस्पताल में एसएसबी के पदाधिकारियों और जवानों के साथ प्रशासनिक पदाधिकारियों का जमावड़ा होने लगा। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। एसएसबी के जवान से लेकर पदाधिकारी तक कुछ भी बोलने से परहेज करते रहे। एसएसबी 45वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट आलोक कुमार कुछ बताने से इंकार करते रहे। इसी बीच बथनाहा 56वीं बटालियन के कमांडेंट और डॉक्टर की टीम भी अनुमंडल अस्पताल पहुंची और घायल जवानों के इलाज में जुट गई। तब तक मझारी स्थित एसएसबी ट्रेनिंग कैंप के डीआईजी राजीव राणा भी अनुमंडल अस्पताल पहुंचे।

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