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धर्म-अध्यात्म:सर्वार्थ सिद्धि और अमृत योग में कल मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्योहार

करजाईन6 दिन पहले
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  • सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता भाई-बहनों का यह पर्व
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भाई-बहन का पर्व रक्षाबंधन इस बार रक्षाबंधन सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत योग में मनेगा। कल अर्थात 3 अगस्त को सावन की आखिरी सोमवारी भी है और इसी दिन रक्षाबंधन भी मनाया जाना है। हालांकि, इस बार कोरोना और लॉकडाउन के चलते अधिकांश भाई और बहनों का एकजगह होना मुश्किल हो गया है। राखी की दुकानों पर खरीदारी कम भीड़ दिख रही है। रक्षाबंधन व्रत विधि विधान के बारे में बताते हुए त्रिलोक धाम गौसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि इस दिन व्रती को प्रातः स्नानादि करके देव, पितर, ऋषियों का तर्पण करना चाहिए। उसके पश्चात कलश स्थापना कर उस पर रक्षा सूत्र रखकर यानी राखी रखकर यथा विधि पूजन करने के पश्चात भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधने का विधान है। धर्मेंद्र मिश्र के मुताबिक इस बार शुभ मुहूर्त : सोमवार प्रातः काल 8:45 मिनट से लेकर दोपहर के 3:10 मिनट तक ही शुभ मुहूर्त है।

देवासुर संग्राम से जुड़ी है रक्षाबंधन की पौराणिक कथा
प्राचीन काल में देवासुर संग्राम हुआ था। जो 12 वर्ष तक चली थी। इस युद्ध में देवताओं के राजा इंद्र अपने से अधिक शक्तिशाली असुरों को देख देवराज रणभूमि छोड़कर भाग खड़े हुए थे। तब इंद्रदेव ने गुरुदेव बृहस्पति से परामर्श किया। गुरुदेव बृहस्पति ने राजा इंद्र को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा विधान करने के लिए कहा। इसके लिए गुरुदेव ने कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसे अभिमंत्रित कर दिया। रक्षा सूत्र के बल पर देवराज इंद्र ने देवासुर संग्राम में असुरों को पराजित कर युद्ध पर विजय प्राप्त की। इसी कारण इस पर्व को हर बुराई से बचाने वाला पर्व भी कहा जाता है।

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