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मृत्यु पर गम बांटिए..:मृत्यु के शोक में डूबे परिवार में भोज खाकर पीड़ित को कर्ज तले दबा देना पाप

सुपौल10 महीने पहले
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  • सामाजिक बदलाव के लिए दैनिक भास्कर की समाज से की जा रही एक पहल

मृत्यु भोज के विरुद्ध अभियान का समर्थन करते हुए मंगलवार करते हुए पीपुल्स पावर के राघोपुर प्रखंड प्रभारी अध्यक्ष श्याम सुंदर यादव ने कहा कि किसी के घर में परिजन रो रहे हैं और हम बड़े चाव से भोज खाते हैं। इससे बड़ी शर्मिंदगी और क्या हो सकती है।     सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड के खाप निवासी रुपेश कुमार ने कहा कि मृत्यु भोज को लेकर भारत सरकार को अतिशीघ्र कानून बनाना चाहिए। धार्मिक दृष्टिकोण से भी मृत्यु भोज उचित नहीं है। त्रिवेणीगंज के मानगंज गोठ निवासी राष्ट्रीय युवा महासंघ वैलफेयर ट्रस्ट के जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश कुमार ने कहा कि मृत्यु भोज सामाजिक कुप्रथा है। जिस घर में मृत्यु होती है, उस घर के लोग शोकाकुल रहते हैं। बावजूद उस घर में मृत्यु भोज होता है। यह अभिशाप है। राष्ट्रीय युवा महासंघ ने संकल्प लिया है ना ही मृत्यु भोज खाएंगे और ना ही खिलाएंगे।

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भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी बसंतपुर के भगवानपुर निवासी प्रदीप कुमार ने कहा कि मृत्यु भोज समाज के प्रगति में बाधा बन चुकी है। मृत्यु भोज करने के बजाय वह राशि शिक्षा पर खर्च करें। 

वहीं कृष्णा सोनी ने कहा कि किसी के घर में मृत्यु का शोक हो और किसी को पकवान खाने का शौक हो। ऐसे भाेज पर लानत है। यह कुप्रथा बंद होनी चाहिए। लोगों को खुद इस बात को समझना चाहिए कि ऐसे माहौल में खाना कैसे खाएं।

किशनपुर के करहिया निवासी नवीन कुमार मंडल ने कहा कि मृत्यु भोज से पीड़ित परिवार कई साल पीछे चल जाता है। उसका आर्थिक जीवन बिगड़ जाता है। ऐसी कुरीतियाें  को पुरी बंद किया जाना चाहिए।

शहर के एसएनएस महिला कॉलेज की डॉ रागिनी सिंह ने कहा कि मृत्युभोज बंद होना चाहिए। कर्ज लेकर अथवा संपत्ति बेच कर भोज करने के लिए गरीबों को दोहरी दुख में नही डालना चाहिए।

पिपरा प्रखंड के बसहा निवासी चंदन कुमार ने कहा कि जिस प्रकार से सती प्रथा एक कुप्रथा थी। ठीक उसी प्रकार मृत्यु भोज भी एक कुप्रथा है। हम सबको मिलकर इसका अंत करना चाहिए।

वार्ड 01 निवासी आशीष कुमार ने कहा कि हमारे समाज में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है। तब पूरे समाज को मृत्यु भोज खिलाते हैं। यह बहुत ही कष्टदायक और शर्मनाक है। समाज को सोचने की जरूरत है कि जिसके घर पहले से ही इतनी बड़ी दुखद घटना हुई हो और पूरे परिवार में मृत्यु का शोक मनाया जा रहा हो। उनके घर मृत्यु भोज खाकर पीड़ित परिवार को कर्ज तले दबा देना पाप है। इसे बदलने की सख्त जरूरत है। 

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