परेशानी:चार साल पहले लगे मिनी वाटर प्लांट से अब तक पानी की सप्लाई नहीं हुई

पतरघट6 महीने पहले
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  • किशनपुर पंचायत का मामला, प्लांट के लिए बने भवन में पड़ा है भूसा

लाखों रुपए की लागत से लगाए गए सौर ऊर्जा चालित मिनी प्लांट बनने के बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हुआ। बिहार सरकार के सौर ऊर्जा चालित मिनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा किशनपुर पंचायत में मिनी वाटर प्लांट लगाया गया था। लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण अब तक पानी उपलब्ध नहीं हो पाया। सौर ऊर्जा चालित मिनी प्लांट स्टैंड दो में ना सौर उर्जा का ठिकाना है ना तो कोई मशीन उपलब्ध है। वहीं जहां मशीन लगाई जाती है वहां गेहूं का भूसा भरा पड़ा हुआ है। आठ सौर ऊर्जा प्लेट में तीन बचा हुआ है। वही जानकारी अनुसार हटिया के कुछ दूरी तक पाइप लाइन बिछाई गई थी। जब इस दौरान वहां के स्थानीय ग्रामीण से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पानी टंकी से चेक करने के लिए एक दिन पानी सप्लाई किया गया था। लेकिन उसके बाद पानी का सप्लाई बंद हो गया। वह आज तक बंद ही पड़ा है। वहां के स्थानीय लोगों को आज तक पानी का एक बूंद भी नसीब नहीं हुआ। जलापूर्ति के लिए किशनपुर पंचायत के हटिया गाछी में मिनी वाटर प्लांट रहने के बावजूद भी लोग आयरन युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। किशनपुर में चार साल पूर्व सौर ऊर्जा चालित मिनी वाटर प्लांट का भवन लाखों की लागत से बनाया गया था उस भवन में भूसा भर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वाटर मिनी प्लांट बने चार वर्ष हो गए।

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