खेती:पिता ने बैंक मैनेजर पद से लिया वीआरएस तो बेटे ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर शुरू की ड्रैगन फ्रूट, ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर की खेती

ठाकुरगंज9 महीने पहले
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  • वार्ड-2 निवासी राधे कृष्णा और इनके बेटे जैमेनी कृष्णा ढाई एकड़ जमीन में कर रहे खेती

लोग अपने व परिवार के भरण-पोषण हेतु उच्च शिक्षा ग्रहण करके विदेशों में या अपने शहर से कोसों दूर रहकर रोजगार कर रहे हैं पर कुछ लोग अपनी प्रतिभा व दृढ़ इच्छा शक्ति और संसाधनों के सहारे युवाओं को आत्मनिर्भर का संदेश अपने घर से ही दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया व आत्मनिर्भर भारत के मंत्र से प्रभावित होकर ठाकुरगंज नगर के वार्ड-2 निवासी राधे कृष्णा (पूर्व शाखा प्रबंधक) व उनके पुत्र जैमेनी कृष्णा (साॅफ्टवेयर इंजीनियर) ने लाखों रुपए के वार्षिक पैकेज को छोड़ किसानी से आत्मनिर्भर का संदेश देने में लगे हैं। पिता-पुत्र क्षेत्र, समाज व युवाओं को नई राह दिखाने की ओर अग्रसर है। दोनों का कहना है उनका लक्ष्य युवाओं को आत्मनिर्भर की ओर अग्रसर करना है। जिसकी शुरुआत पिता-पुत्र ने अपने ढाई एकड़ खेत में ड्रैगन फ्रूट व ग्राफ्टेड बैंगन, टमाटर की खेती से की है।

छत्तीसगढ़ में देखी खेती अौर अब गांव आकर उगा रहे फसल, टमाटर और बैगन लगाने में लगे 30 हजार रुपए
राधे कृष्णा का कहना है कि बैंक में शाखा प्रबंधक थे। इन्होंने अपनी नाैकरी से वीआरएस ले लिया। इनके बेटे जैमेनी कृष्णा पुणे में साफ्टवेयर इंजीनियर थे। पिता-पुत्र दोनों का वार्षिक पैकेज 30 लाख रुपए से अधिक था, लेकिन कोरोना काल के बाद कुछ नया करना चाहते थे। जिससे अपने क्षेत्र के युवाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखा सके। उन्होंने ग्राफ्टेड बैगन व टमाटर की खेती छत्तीसगढ़ भ्रमण के दौरान देखी थी। इसके बाद पुत्र के अपने ढाई एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट के साथ इन दोनों फसलों की खेती शुरू की। तरबूज लगाने का भी प्रयोग शुरू किया। उन्होंने बताया कि पहली बार खेती में मलचिंग पेपर का प्रयोग किया। जिससे सिंचाई में पानी की खपत कम के साथ खर-पतवार की सफाई का खर्च बच सके। 5 हजार ड्रैगन फ्रूट, 2500 ग्राफ्टेड बैंगन, टमाटर लगाया है। टमाटर व बैगन लगाने में लगभग 30 हजार रुपए की लागत आई है।

एक एकड़ में एक लाख किलो तक बैंगन का हो सकता है उत्पादन, 5-6 फीट तक लंबा पौधा
राधे कृष्णा व उनके पुत्र का कहना है कि ग्राफ्टेड बैंगन व टमाटर में जंगली बैगन की जड़े होने से यह पौधा 5-6 फीट तक होगा। यह किसी भी मौसम की मार झेलने में समर्थ होता है। एक एकड़ में छत्तीसगढ़ में युवा किसान एक लाख किलो तक बैगन उपजा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता भगवती प्रसाद 1997 में कृषि उप निदेशक पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने ठाकुरगंज में केले की खेती के गुर खेती करके सिखाया था। उनके ही प्रेरणा से खेती करके युवाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाने के लिए अग्रसर है। युवाओं में यह संदेश जाना आवश्यक है कि छोटी जमीन पर खेती करके भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। बस अपनी प्रतिभा व दृढ़ इच्छा शक्ति से कोई कार्य करना चाहिए।

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