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राहत:वायरल वीडियो में शराब पीने के आरोपी अकाउंटेंट को जांच टीम ने दी क्लीन चिट

त्रिवेणीगंज6 दिन पहले
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  • एफआईआर दर्ज कर पुलिस कर रही जांच, रिपोर्ट में बताया-वीडियो काफी पुराना, कब का है-पता नहीं

त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के अकाउंटेंट और आउटसोर्सिंग के सुपरवाइजर के वायरल वीडियो मामले में नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद आनन-फानन में विभागीय के वरीय अधिकारियों ने डॉक्टरों की तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी। जिसमें डॉ मजीता जायसवाल, डॉ राजीव रंजन एवं डॉ उमेश मंडल शामिल थे। इस तीन सदस्यीय जांच टीम में कहा है कि 08 सितंबर को वायरल हुए वीडियो का गहन जांच किया गया। जिसमें लेखापाल सुभाष सिंह, लालपट्टी निवासी सर्वेश यादव एवं एक अन्य व्यक्ति कमरे में बैठ कर भोजन करते दिख रहे हैं। देखने से ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है कि ये लोग शराब का सेवन कर रहे हैं। वहां टेबुल पर एक स्प्राइट का बोतल दिखाई पड़ रहा है। वीडियो में लेखापाल सुभाष सिंह का बाल बहुत छोटा दिखाई दे रहा है। इससे प्रतीत होता है कि वीडियो काफी पुराना है। जबकि दूसरे वीडियो में लेखापाल सुभाष सिंह, आएट सोर्सिंग प्रबंधक अर्जुन सरदार एवं अन्य दिखाई दे रहे हैं। जिसमें ये लोग स्प्राइट एवं माजा की बोतल से कोल्ड ड्रिंक पीते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें कहीं भी शराब जैसा कुछ प्रतीत नहीं हो रहा है। साथ ही जिस जगह का वीडियो है, उसका छत चदरा-ऐल्बेस्टर का दिख रहा है। इस प्रकार का कोई भी कमरा अस्पताल परिसर में मौजूद नही है। जिससे स्पष्ट होता है कि यह वीडियो अस्पताल परिसर से बाहर का है। इस प्रकार विभागीय जांच टीम ने सभी को क्लीन चिट दे दी है।

पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
दूसरी ओर पुलिस ने पूरे मामले को लेकर त्रिवेणीगंज थाने में कांड संख्या 299/21 दर्ज कर ली है। पुलिस ने वायरल वीडियो, संकलित साक्ष्य और गहन जांच के बाद वीडियो में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ करते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की बात कही है। पुलिस ने इस मामले को लेकर दर्ज प्राथमिकी में लिखा है कि वायरल वीडियो के अवलोकन व सत्यापन से स्पष्ट है कि दिखाई दे रहे उक्त लोगों द्वारा प्रतिबंधित शराब अथवा मादक द्रव्य का सेवन किया जा रहा है। वीडियो क्लिप में दिखाई दे रहे कृत्य से अस्पताल में इलाजरत मरीजों के भी जीवन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। किसी भी स्थान पर शराब का उपयोग करना व नशा करने की अनुमति देना, अपने स्वयं के आवास अथवा परिसर में शराब को जमा होने की अनुमति देना, शराब रखना या शराब रखने की जानकारी होना बिहार मद्य निषेध और उत्पाद (संशोधन) अधि0-2018 के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना है। उधर, अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ आरपी सिन्हा ने कहा कि पुलिस द्वारा केस दर्ज की गई है। पूरे मामले की फिर से विभागीय जांच की जाएगी।

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