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घोर लापरवाही:त्रिवेणीगंज अस्पताल से शाम को मरीज रेफर; लाचार पीड़िता पहुंची तांत्रिक के यहां, डीएम के संज्ञान पर रात में उसी अस्पताल में इलाज

त्रिवेणीगंज8 दिन पहले
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त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल, जहां ड्यूटी से गायब थे सभी डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल, जहां ड्यूटी से गायब थे सभी डॉक्टर।
  • लालपट्‌टी वार्ड-16 के मंजेश की पत्नी को सांप के डंसने पर ले गए थे अस्पताल, नहीं मिले डॉक्टर सिविल सर्जन व डीएम से शिकायत की तो एपीएचसी से डॉक्टर आए और बिना देखे मरीज को सदर अस्पताल किया रेफर
  • ड्यूटी से गायब रहे डॉक्टर बोले, मुझसे 18-24 घंटे लिया जा रहा काम, कुछ देर के लिए गया था बाहर
  • शनिवार रात 12 बजे प्रभारी उपाधीक्षक आए तो महिला मरीज का किया गया इलाज

लालपट्टी वार्ड-16 निवासी मंजेश कुमार की 21 वर्षीय पत्नी और सर्प दंश की शिकार अनिता देवी को शनिवार शाम सवा आठ बजे अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया। यहां ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं थे। परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों से महिला के इलाज की गुहार लगाई। एक स्वस्थ्यकर्मी ने कहा कि यह अस्पताल है, कोई धर्मशाला नहीं। परिजनों ने सिविल सर्जन और डीएम को फोन कर यह बात बताई। 30-35 मिनट बाद सुमहा एपीएचसी में पदस्थापित डॉक्टर आए (इनका अनुमंडल अस्पताल में पदस्थापन नहीं है) और मरीज को सदर अस्पताल रेफर कर दिया। आर्थिक तंगी से लाचार परिजन मरीज को घर ले गए। मरीज के इलाज के लिए तांत्रिक का सहारा लिया। काफी देर तक मरीज तांत्रिक के पास रही। परिजन ने बताया कि भगवान का शुक्रगुजार हैं कि सांप के काटने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। नहीं तो डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान जा सकती थी। इधर, मरीज के परिजनों की शिकायत पर डीएम महेंद्र कुमार ने अपर अनुमंडल पदाधिकारी प्रमोद कुमार को भेज महिला मरीज को तांत्रिक के पास से पुनः अनुमंडल अस्पताल बुलाया। उसके बाद शनिवार रात 12 बजे प्रभारी उपाधीक्षक आए व अपर अनुमंडल पदाधिकारी की देखरेख में उक्त मरीज का इलाज किया गया।

प्रभारी उपाधीक्षक पर अस्पताल से गायब रहने का आरोप
अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्रभारी उपाधीक्षक पक्षपात की भावना से जबरन डॉक्टर से 18-24 घंटा ड्यूटी लेते हैं। खुद 3 दिनों से अस्पताल से गायब हैं। इमरजेंसी ड्यूटी से इनका गायब रहना कोई नई बात नहीं है। इनका सभी काम फोन और यहां के प्रबंधक अपने हिसाब से करते हैं।

‘रोस्टर बनाया पर उसके मुताबिक डॉक्टर नहीं करते ड्यूटी, यहां पीने का स्वच्छ पानी तक नहीं’
मामला गरमाने पर एक सप्ताह पूर्व योगदान देने वाले जूनियर डॉक्टर दीपक कुमार ने बताया कि अस्पताल में इमर्जेंसी के लिए 4 डॉक्टरों की ड्यूटी का एक रोस्टर है, लेकिन कुछ दिनों से सभी डॉक्टरों की ड्यूटी की जगह पर प्रभारी उपाधीक्षक के दबाव पर मुझसे से जबरन 18-24 घंटे भूखे-प्यासे ड्यूटी कराते हैं। हम मशीन नहीं है। बाथरूम जाने तक का समय नहीं मिलता। उनके मौखिक आदेश पर डर से 18-24 घंटे यह सोचकर ड्यूटी करते हैं कि वे हमसे सीनियर हैं। यहां के प्रभारी भी हैं। शनिवार शाम 5-6 बजे के बीच जब भूख से नहीं रहा गया तो गार्ड से एक बोतल पानी और एक डिब्बा बिस्कुट मंगाए। यह खाकर लगातार हम काम कर रहे हैं। यहां पीने का स्वच्छ पानी तक नहीं है। कुछ देर के लिए यहां से निकलकर फ्रेश होने गए थे। मेरे फ्रेश होने के लिए जाने के बाद कुछ देर के लिए यहां डॉक्टर नहीं थे। इसी बीच महिला मरीज आई, जिसको जो डॉक्टर यहां पदस्थापित नहीं हैं, उन्होंने उसे रेफर कर दिया। हम तो यहां नए हैं। हमें कुछ यहां के बारे में पता नहीं है। वहीं, अस्पताल प्रबंधक प्रेम रंजन ने कहा कि डॉक्टरों को ड्यूटी पर लगाना मेरा काम नहीं है। यह प्रभारी सर का काम है। वह यहां नहीं हैं। आएंगे तो उनसे पूछिएगा।

आरोप बेबुनियाद हैं, अस्पताल में डॉक्टर की है भारी कमी

रात में एसडीओ आए तो उसका इलाज हो गया। परिजनों का आरोप और अस्पताल से मेरे गायब रहने व बाहरी डॉक्टर के आने का आरोप बेबुनियाद है। मुख्य बात है कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। एक डॉक्टर 7-7 दिन ड्यूटी करते हैं। इधर, सीएस ने कहा कि जो भी बात है, वह डॉ. द्रवे से कीजिए।

मामले की जांच में जो दोषी मिलेंगे, उन पर होगी कार्रवाई

मामला मेरे संज्ञान में आया हुआ है। मैं खुद अपने स्तर से मामले की जांच कर रहा हूं। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
-महेंद्र कुमार, डीएम

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