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अनदेखी:गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं महादलित बस्ती के लोग

उदाकिशुनगंज8 दिन पहले
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  • जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों पर भी ग्रामीणों की गुहार का भी नहीं पड़ा असर, आंदोलन की चेतावनी

अनुमंडल मुख्यालय के वार्ड संख्या-सात महादलित बस्ती के लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। बस्ती के चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। ऐसे में 20 से अधिक परिवार महामारी की चपेट में आ सकते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि यहां पर कोई सुविधा नहीं मिल पाई है। जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक इस व्यवस्था को लेकर मौन हैं। जबकि इस मामले में प्रखंड से लेकर जिला तक शिकायत की गई है। महामारी के इस दौर में यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकता है। मिली जानकारी के अनुसार बताया गया कि दो से तीन वर्ष पूर्व सड़क निर्माण को लेकर योजना स्वीकृत की गई थी। सड़क निर्माण के लिए मिट्टी भराई की जा रही थी। इसी बीच कुछ लोगों ने निजी जमीन होने का हवाला देकर कार्य को रोक दिया। उन लोगों ने सीओ और एसडीओ को आवेदन भी दिया। आवेदन में कहा गया कि यह जमीन निजी है, यहां सड़क बनाने नहीं देंगे। जबकि कई दशकों से यह आने- जाने का रास्ता है और कुछ वर्ष पूर्व ईंट सोलिंग कर सड़क भी बनाई गई थी।

कई बार किया गया सड़क बनवाने का प्रयास
मुखिया संजीव कुमार झा ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए योजना स्वीकृत की गई थी। कुछ लोगों के द्वारा जबरन कार्य को रोक दिया गया और इस संबंध में अधिकारियों से कहा गया कि यह निजी जमीन है। यहां कार्य बंद कराया जाए। इसके बाद सड़क का मामला अधर में लटक गया है। मुखिया ने बताया कि वह कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं हैं। इधर गांव के लोगों को आवाजाही करने में काफी समस्या उत्पन्न हो रही है। हल्की बारिश में भी 20 से अधिक परिवारों को घर के अंदर बंद होना पड़ जाता है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छता अभियान की इस बस्ती में धज्जियां उड़ते हुए देखी जा सकती है। बस्ती में जैसे-तैसे कुछ शौचालय तो बना दिए गए हैं, लेकिन कुछ ही माह के बाद वह खंडहर में तब्दील हो गए। बारिश के समय में घुटने भर से अधिक पानी पूरे बस्ती में लग जाता है।

समस्या का जल्द समाधान निकाला जाएगा
मामले की जानकारी प्राप्त कर जल्द समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
प्रभात केशरी, बीडीओ

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