लोक संगीत कार्यशाला:कीर्तनिया, विद्यापति नाच व गोड़ की मिली जानकारी

आरा11 दिन पहले
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प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी द्वारा कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करते प्रशिक्षु। - Dainik Bhaskar
प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी द्वारा कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करते प्रशिक्षु।

15 दिवसीय अभिनय एवं लोक संगीत कार्यशाला में शनिवार को नेशनल साइंटिफिक एवं सोशल एनालिसिस ट्रस्ट सभागार में प्रशिक्षुओं ने सात स्वरों का अभ्यास किया एवं अभिनय के विशेष टिप्स सीखें। वरिष्ठ रंगकर्मी अम्बुज कुमार ने प्रशिक्षुओं को मंच के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंच को 9 भाग में बांटा गया है, सभी का अपना अपना महत्व है। साथ हीं बिहार के विभिन्न लोक नाटक कीर्तनिया, विद्यापति नाच, जट जटिन एवं गोड़ की जानकारी दी।

प्रशिक्षुओं ने श्रम गीतों का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। लोक संगीतकार श्याम शर्मीला ने कहा कि.खेती संबंधित दैनिक कार्यो या घरेलु कार्यों को करते हुए जो गीत गाये जाते है, उसे श्रम गीत कहा जाता है। श्रम गीत रोपनी एवं सोहनी के समय भी गाया जाता है। घर में कार्य करते हुए महिलाएं जतसार गाती है। दिल्ली से आये रंगकर्मी नितेश सोनी ने कहा कि नाटक में अनुशासन का बहुत बड़ा महत्व है।

कार्यशाला निदेशक अम्बुज कुमार ने भिखारी ठाकुर के नाटक ‘ गंगा स्नान’ के विशेष कड़ी की बारीकियों को बताया। नाट्य निर्देशक मनोज सिंह ने कहा कि भिखारी ठाकुर के नाटक संगीत प्रधान है। प्रशिक्षु निक्की कुमारी ने बताया कि अब जाता,-मुसर, ढेका आदि का प्रचलन देखने को नही मिलता। प्रशिक्षु मुकेश ने कार्यशाला में मिल रही जानकारियों पर प्रसन्ता जाहिर की।

प्रशिक्षुओं में शालिनी कुमारी, रितु पाण्डेय, मुकेश ओझा, ऋतिक, दीपक तिवारी रितेश कुमार टाइगर समेत कई थे। कार्यशाला में शामिल अन्य लोगों में डॉ पंकज भट्ट, कार्यशाला संयोजक मनोज श्रीवास्तव, राजन जी खशुबू स्प्रिंहा एवं प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी के सचिव कमलेश कुंदन थे।

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