भास्कर एक्सक्लूसिव:18 पंचायतों में बनेंगे 23 वाटरशेड 9293 हेक्टेयर भूमि की बुझेगी प्यास

डुमरांव7 दिन पहलेलेखक: अरविन्द चौबे
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जलस्रोत से पानी पीतीं नीलगायें। - Dainik Bhaskar
जलस्रोत से पानी पीतीं नीलगायें।

वर्षा जल से सिंचाई पर निर्भर जिले के किसानों को सामाजिक व आर्थिक रूप से अधिकार संपन्न बनाने के लिए भूमि संरक्षण विभाग ने महत्वपूर्ण योजना तैयार की है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलछाजन विकास कार्यक्रम के तहत वैसे क्षेत्र जहां संसाधन के अभाव में सिंचाई नहीं हो पाती है। उन क्षेत्रों में भूमि संरक्षण विभाग जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगा।

योजना में बक्सर जिले के 5 प्रखंडों के 18 पंचायतों की 9 हजार 298 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। इस व्यवस्था के लिए 20 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। इस योजना में 23 माइक्रो वाटरशेड को भी बनेंगे। जिला भूमि संरक्षण के सहायक निदेशक राम दयाल सिंह ने बताया कि वैसे क्षेत्र जहां संसाधन के अभाव में किसानों को सिंचाई की समस्या होती है। उन क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार सिंचाई के संसाधन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए डीपीआर तैयार है। डीएम से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद योजना पर काम शुरू किया जाएगा।

योजना के निगरानी के लिए गठित होगी समिति

सहायक निदेशक ने बताया कि यह पंचवर्षीय योजना है। योजना को क्रियान्वित करने के लिए 18 पंचायतों में जहां का रकबा अधिक होगा, वहां जलछाजन समिति गठित होगी। समिति प्रदूषण नियंत्रण, संसाधनों के अति-शोषण को कम करना, जल भंडारण, बाढ़ नियंत्रण, अवसादन की जांच, वन्यजीव संरक्षण, कटाव नियंत्रण और मिट्टी की रोकथाम, नियमित जलापूर्ति के लिये भूजल स्तर को बनाए रखना इत्यादि की मॉनिटरिंग करेगी।

समिति के पदेन अध्यक्ष मुखिया होंगे और वहां एक सचिव का चयन किया जाना है। हालांकि कुछ प्रखण्ड में सचिव का भी चयन हो चुका है। इसके चयन के लिए बीकॉम, बीएससी या बीए ऑनर्स अभ्यर्थी का होना जरूरी है। बीकॉम वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी।

दिया जा रहा है 75 प्रतिशत अनुदान
योजना का लाभ उन किसानों को दिया जा रहा है जिनके पास अपनी खुद की कृषि योग्य भूमि हैं और जल संसाधन होगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए कृषि में विस्तार होगा। उत्पादकता में वृद्धि होगी। जिससे अर्थव्यवस्था का पूर्ण विकास होगा। सरकार की ओर से 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। जिससे ड्रिप स्प्रिंकलर से सिंचाई योजना का फायदा भी किसानों को मिलने लगा है।

जलसंकट के निबटने की तैयारी है वाटरशेड प्रबंधन
बढ़ती जनसंख्या की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिये जल का बड़े पैमाने पर दोहन किया जा रहा है। जिसके कारण भू-सतह पर मौजूद जल के साथ ही भूजल का स्तर नीचे गिरता जा रहा है। तीव्र औद्योगिकीकरण के फलस्वरूप पर्यावरणीय प्रदूषण बढ़ने के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है। जिससे ग्लेशियर के रूप में जमा मीठा जल बड़े पैमाने पर पिघल कर समुद्र के खारे पानी में मिल रहा है। जिससे निकट भविष्य में जल संकट गहराने के कारण जीवन के अस्तित्व पर खतरे की सम्भावना बढ़ती जा रही है। इसीलिए वाटरशेड प्रबंधन पर जोर दिया है।

जिले में पांच प्रखण्ड के 18 पंचायतों को मिलेगा

  • डुमरांव प्रखंड - मुंगाव, कोरानसराय, मठिला, अरियाव
  • चौगाई प्रखंड - मसरिया, खेवली, नचाप एवं चौगाई
  • ब्रह्मपुर प्रखंड - एकरासी
  • इटाढ़ी प्रखंड - उनवास, बसाव कला, विक्रम इंग्लिश, हरपुर, जयपुर, इंदौर एवं बड़का गांव व नारायणपुर
  • नावानगर प्रखंड - बाबूगंज इंग्लिश

'सरकार की मंशा है कि हर खेत को पानी पहुंचे। सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य भूमि का विस्तार हो। लघु सिंचाई और जल स्रोतों को दुरुस्त किया जाएगा। सिंचाई के साथ खेती के क्षेत्र का विस्तार करने, पानी की बर्बादी कम करने और पानी में सुधार करने के लिए योजना लागू की जा रही है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जल संचयन और जल सिंचन के माध्यम से सूक्ष्म स्तर पर वर्षा जल के दोहन से सुरक्षात्मक सिंचाई भी होगी।'
-रविन्द्र कुमार वर्मा, संयुक्त निदेशक

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