13 नंवबर से बक्सर में पंचकोशी यात्रा शुरू:पांच जगहों पर पड़ाव के साथ अलग अलग बनते हैं पकवान, देश भर से जुटते हैं श्रद्धालु

बक्सर3 महीने पहले

बक्सर में पांच दिनों तक चलने वाले पौराणिक महत्व वाले पंचकोशी परिक्रमा का मेला कल यानी रविवार से प्रारम्भ हो जाएगा। 13 नवम्बर की सुबह से ही बक्सर के रामरेखा घाट से स्नान दान के साथ साधु संतों का जत्था प्रथम पड़ाव अहिल्या धाम के लिए रवाना होगा। इस दिन श्रद्धालु देवी अहिल्या का पूजन कर पुआ-पकवान का भोग लगाएंगे तथा रात्रि विश्राम करेंगे। इस यात्रा के दौरान पांचों पड़ाव पर मेले का भी आयोजन किया जायेगा।जहां देश भर से श्रद्धालु पहुंचते है।जिसकी तैयारी पुरी कर ली गई है।

पहले दिन पुआ पूड़ी तो पंचावे दिन बनता है लिट्टी चोखा

अयोध्या से जब राम जी महामुनि विश्वामित्र के साथ जब बक्सर पहुंचे हुए थे।ताड़का बध के बाद जिले के यहां पर रहने वाले ऋषि मुनियों के दर्शन के लिए उनके यहां पहुंचे और वहां अपने हाथों से स्वंम भोजन बना ऋषियों का आशीर्वाद लिया।तभी से यह परम्परा आज तक चली आ रही है। जहां उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासनिक तैयारी भी पूरी कर ली गई है।

अलग पकवान के साथ मेले का आयोजन

रविवार को सुबह 08 बजे रामरेखाघाट पर साधु-संतों के जयघोष के साथ यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। वहां से संत समाज भजन-कीर्तन करते हुए अहिरौली पहुंचेंगे। दूसरे दिन 14 नवंबर को नदांव स्थित देवर्षि नारद आश्रम में खिचड़ी का भोग लगाकर रात्रि पड़ाव रहेगा।

जबकि 15 नवंबर को भार्गव आश्रम भभुवर में चूड़ा-दही, चौथे दिन 16 नवंबर को नुआंव स्थित उद्दालक आश्रम में सत्तू-मूली तथा 17 नवंबर को अंतिम दिन चरित्रवन स्थित विश्वामित्र आश्रम में लिट्टी-चोख का महाभोज के साथ यात्रा का समापन किया जाएगा। अंतिम दिन बक्सर के अलावे भोजपुर रोहतास,कैमूर, और UP के बलिया और गाज़ीपुर जिले के घर घर मे लिट्टी चोखा ही बनाया जाता है।