टोल फ्री नंबर पर नहीं हो रही बात:बिजली कंपनी का सिर्फ मीटर ‘स्मार्ट’, काम नहीं, यहां समस्या का नहीं होता है समाधान

बक्सर10 दिन पहले
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स्मार्ट मीटर लगाते कर्मी। - Dainik Bhaskar
स्मार्ट मीटर लगाते कर्मी।

एक तो पहले से लगे डिजिटल मीटर की गड़बड़ विपत्र से लोग परेशान हैं ही ऊपर से यह स्मार्ट प्रीपेड मीटर का फार्मूला लोगों को अंधेरा में रहने को विवश कर दिया है। रिचार्ज कराने के बाद भी कई उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बैलेंस माइनस में दिखा रहा है। सही मायने में देखा जाए ताे बिजली कम्पनी के स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ता काफी परेशान हो रहे है। शिकायतों का समाधान नहीं हो रहा है।

बता दें कि लॉकडाउन से आर्थिक रूप से टूट चुके सैकड़ों परिवार अभी खुद को संभालने की जहां कोशिश कर रहे हैं, वहां बिजली कम्पनी का यह प्लान रास नहीं आ रहा है, क्योंकि इसमें मोबाइल से रिचार्ज कराने की झंझट व पैसे की कमी होने से अंधेरे में रहना पड़ रहा है। ऐसे बिजली गुल रहने की स्थिति में लोगों को मोबाइल चार्ज करना, पानी का मोटर, टीवी व रोशनी आदि की गम्भीर समस्या खड़ी हो गई है।

ऐसा ही समस्या जिले के डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नम्बर 9 के साथ ही अन्य जगहों की है। जहां दो दर्जन घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद किसी न किसी समस्या की वजह से लोगों को अंधेरे में रहने को विवश कर दिया है।

जंगल बाजार रोड स्थित रहमत खैनी दुकान के दुकानदार रहमत ने जब आपबीती बताया तो लगा कि बिजली कम्पनी ने किस तरह से रहमत किया है। उन्होंने बताया कि 8 अप्रैल को उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा। जहां रिचार्ज करने के 22 घण्टे बाद उन्हें बिजली नसीब हुआ वो भी कई बार शिकायत करने के बाद। इस तरह 18 अप्रैल को 100 रुपए से रिचार्ज करने के बाद 19 अप्रैल को 11 बजे लाइट आई थी।

घड़ी दुकानदार मो अहमद अली ने बताया कि 18 अप्रैल को इन्होंने 100 रुपये से रिचार्ज किया। जिसमें 24 रुपया माइनस कर 63 रुपया बैलेंस दिया है। अब संशय यह बना हुआ है कि कब लाइन कट जाएगा। पहले ठीक था, पैसा महीने पर देने पड़ रहे थे।

डुमरांव के वार्ड नम्बर 9 के निवासी ठेला चालक का परिवार पिछले पांच दिनों से बिजली के अभाव में अंधेरे में जीने को विवश है। क्योंकि स्मार्ट मीटर लगने के बाद पैसे के अभाव में मीटर को रिचार्ज तक नहीं कर सका है। ऐसे में इन्हें पानी तो किसी तरह मिल जा रही है। किंतु लाइट के अभाव में अंधेरे में रहना पड़ रहा है। इनका कहना है कि गरीब आदमी हैं साहब इससे अच्छा तो था कि किरासन मिलता था कम से कम शाम में लालटेन तो जला लेते थे।

जोगेंद्र प्रसाद का कहना है कि मेरी पत्नी रामेश्वरी देवी के नाम पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर 14 अप्रैल को लगा है। आज यानी बुधवार को लाइट कट जाने से पीने की पानी तक कि समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने बताया कि कनेक्शन के दौरान जो मोबाइल नम्बर दिया गया था, वो बन्द हो गया है। जबकि बिजली कम्पनी का कहना है कि उसी नम्बर पर मैसेज जाएगा तब रिचार्ज होगा। बाद में रिचार्ज कराने पर चालू हुआ। इतना ही नहीं जहां पहले पूरे महीने का मात्र 800 का विपत्र आता था अब मात्र 25 दिन में ही 800 का रिचार्ज खत्म हो गया।

थाना के समीप वार्ड नम्बर 4 के निवासी अमित कुमार कहते हैं कि जहां पहले एक माह में 500 से 800 के बीच विपत्र आता था, वही तीन दिनों में 1900 रुपए का रिचार्ज कराया। इस तरह लगता है कि कमाई का आधा हिस्सा अब बिजली कम्पनी को ही चुकानी पड़ेगी। उपभोक्ता ने बताया िक कई बार कार्यालय जाकर समस्या की शिकायत की। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। जा-जाकर हमलोग थक गए हैं।

माइनस में चला जा रहा रिचार्ज अमाउंट
ऐसे में सबसे हिट जिला बक्सर के इस मोहल्ले के लोग गर्मी से परेशान होकर दरवाजे के चबूतरे पर बैठ कर दिन कटा रहे हैं और रात कैसे कटेगी यह समस्या से पूरी तरह से परेशान दिखे। इस दौरान कई गम्भीर मामले सामने आए जो स्मार्ट मीटर की खामियों को उजागर किए। कइयों के चेहरे पर तो इस व्यवस्था के प्रति गम्भीर नाराजगी दिखी।

लोगों का कहना है कि पहले यह ठीक था कि महीने में विपत्र जमा करना पड़ता था, अब तो हर समय यह चिंता बनी रह रही है कि कब रिचार्ज खत्म हो जाएगा। सबसे अधिक परेशानी माइनस में बैलेंस जाने को लेकर है। तकनीकी गड़बड़ियों के कारण ऐसा हो रहा है। शिकायत पर बिजली कंपनी के अधिकारी सुनते ही नहीं हैं।

'विगत माह की 23 तारीख को बिल बना था। उसके बाद जिनके उपभाेक्ताओं के यहां मीटर लगे हैं। उनके यहां पूर्व का बकाया राशि कटने से बैलेंस माइनस हुआ है। ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही बताया कि कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण भी बैलेंस माइनस में चला जाता है। जिसकी जांच कर उसे ठीक कर दिया जा रहा है। उन्हाेंने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के कारण उपभाेक्ताओं काे हाे रही परेशानी काे दूर करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। कुछ दिनों में ये समस्याएं स्वतः दूर हो जाएंगी।'

- अजीत कुमार, अभियंता, शहरी क्षेत्र बिजली कंपनी

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