दिशा निर्देश का अनुपालन कराने को लेकर निर्देश:दुर्गा पूजा में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के गाइडलाइन का सभी को करना होगा पालन

बक्सर6 दिन पहले
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जानकारी देते डीएम व एसपी - Dainik Bhaskar
जानकारी देते डीएम व एसपी

दुर्गा पूजा में मूर्ति स्थापित करने व विसर्जन के क्रम में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद नई दिल्ली द्वारा जारी दिशा-निर्देश का अनुपालन करना होगा। इसको लेकर डीएम अमन समीर व एसपी नीरज कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से बैठक करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को जारी दिशा निर्देश का अनुपालन कराने को लेकर निदेश दिया है।

डीएम ने पोलीस्टाइरीन और विस्तारित पोलीस्टाइरीन सहित एकल उपयोग वाले प्लास्टिक वस्तुओं के विनिर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग को निषेध है। प्लास्टिक स्टिक युक्त ईयर बडस, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की डंडिया, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम की डंडिया, पोलीस्टाइरीन (थर्मोकोल) की सजावट सामग्री। प्लेंटे, कप, गिलास, कॉटे, चम्मच, स्ट्रॉ, ट्रे जैसे कटलरी मिठाई के डिब्बे, निमंत्रण कार्ड और सिगरेट पैकेट के इर्द-गिर्द लपेटने या पैक करने वाली फिल्में, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक या पीवीसी बैनर, स्टरर।

प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक (थर्मोकोल सहित) उत्पादों का उपयोग मूर्ति निर्माण तथा पंडाल सजावट में न हो इस हेतु सभी मूर्ति निर्माताओं तथा पंडाल निर्माताओं को सचेत करने का निर्देश दिया है। बिहार (पूजा के उपरान्त मूर्ति विसर्जन प्रक्रिया) नियमावली 2021 के अनुसार प्रत्येक पूजा समिति यह सुनिश्चित करेगी कि मूर्तियों को प्राकृतिक सामग्री जैसे पारंपरिक मिटटी, बांस आदि से बनाया जाएगा, मूर्ति निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) का उपयोग नहीं किया जाएगा, मूर्तियों की रंगाई के लिए जहरीले और गैर-जैव विघटनीय रासायनिक रंगों और कृत्रिम रंग का उपयोग नहीं किया जायेगा,

मूर्तियों को पानी में घुलनशील और गैर विषैले प्राकृतिक रंगों से रंगा जाएगा, मूर्ति के उपरी ढांचा की उंचाई 40 फीट से कम होनी चाहिए और मूर्ति भी 20 फीट से अधिक उची नहीं होनी चाहिए, पूजा सामग्री जैसे फूल और कागज और प्लास्टिक से बनी अन्य सजावटी सामग्री को मूर्तियों के विसर्जन से पहले हटाया जाना चाहिए और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2016 के अनुसार निपटान के लिए जैव-विघटनीय सामग्रियों अलग से एकत्र की जानी चाहिए।

पूजा समितियों से अनिवार्य रूप से घोषणा पत्र प्राप्त कर लिये जाये की जिसमें मूर्तियों के निर्माण और उपरी संरचना को खडा करने में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) का उपयोग नहीं किया गया है, मूर्तियों के निर्माण और उपरी संरचना के निर्माण में पारा, कैडमियम, आर्सेनिक, शीशा और क्रोमियम जैसी जहरीली भारी धातुओं वाले कृत्रिम रंग का उपयोग नहीं किया गया है, मूर्ति की उंचाई 20 फीट तक सीमित है, विसर्जन के समय मूर्ति विर्सजन की प्रक्रिया के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा जारी सभी निर्देशों, जिसमें मूर्ति विसर्जन से संबंधित केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद नई दिल्ली द्वारा जारी दिशा-निर्देश शामिल होंगे, का अनुपालन कराने हेतु सभी पदाधिकारियों को निदेशित किया गया है।
कृत्रिम तालाबों में ही मूर्तियों का विसर्जन
अपने क्षेत्रांतर्गत विभिन्न पूजा समितियों के द्वारा किये जा रहे आयोजनों का आकलन करते हुए मूर्तियों के विसर्जन के लिए पर्याप्त संख्या में कृत्रिम तालाब का निर्माण कर पूजा समितियों को इनके साथ टैग या चिन्हित कर लिया जाय ताकि मूर्ति विसर्जन की प्रक्रिया में भीड-भाड की स्थिति उत्पन्न न हो तथा प्रदूषण का भार कम हो। कृत्रिम तालाबों या विसर्जन स्थलों का निर्माण कर मूर्ति विसर्जन की ऐसी घटनाओं से पूर्व जन जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से जनता और पूजा समितियों को सूचित करने का निर्देश दिया गया। मूर्ति विसर्जन प्रक्रिया के दौरान विसर्जन स्थल पर जनित ठोस कचरा जैसे फूल, कपडा, सजावट सामग्री आदि को जलाने पर रोक लगायी जाय।

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