ताड़ी को लेकर मनमानी:पंद्रह दिनों में नीरा बिक्री केंद्र हुआ बंद,ताड़ी की महफिल सजी

बक्सर9 दिन पहले
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सड़क किनारे सजी ताड़ी की महफ़िल। - Dainik Bhaskar
सड़क किनारे सजी ताड़ी की महफ़िल।

शराबबंदी और ताड़ी की बिक्री पर पाबंदी के बावजूद ना तो शराब की तस्करी रुक रही है और ना ही ताड़ी का सेवन बंद हो रहा है। ताड़ी से बने नीरा के कारोबार से जीविका दीदियों की तकदीर बदल रही है। ऐसा दावा दस दिनों पूर्व ही जीविका द्वारा किया जा रहा था। बताया गया कि शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नीरा की बिक्री जीविका दीदियों ने शुरू कर दी है। रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और ग्राहकों को शुद्ध, पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक पेय नीरा मिलने लगा है।

डुमरांव एवं नवानगर के बाद 19 अप्रैल कलेक्ट्रेट के समक्ष काउंटर खोलकर बताया गया कि नीरा के प्रति ग्राहक अपनी रूचि भी दिखा रहे हैं। लेकिन, हकीकत इसके उलट है। पंद्रह दिन भी नीरा उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकी। कलेक्ट्रेट के सामने लगा काउंटर तो दस दिनों में ही बंद हो गया। सरकार के दबाव जीविका के अधिकारी कागजों में काउंटर खोलने के बाद बिक्री भी दिखा दिए।

शहर के राजीव मिश्रा बताते हैं कि नीरा के बारे में काफी सुना था। 19 अप्रैल देखा भी और दो ग्लास पी भी लिया। स्वाद में तो बढ़िया था ही इसके पीने से कई बीमारियों से बचा भी जा सकता है। लिहाजा मैं रोज एक ग्लास पीने की सोच रहा था।

लेकिन, सरकार की इस योजना का लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा है। वहीं ताड़ी बेचने वाले महफ़िल सजा रहे हैं। जिला परियोजना प्रबंधक का कहना है कि नीरा उत्पादन काफी कम हो रहा है।

फैक्ट फ़ाइल

  • 200 लीटर नीरा का प्रतिदिन उत्पादन कर रहा जीविका
  • 107 लोगों को दिया गया है नीरा संग्रहण लाइसेंस
  • 57 निबंधित लोग फिलहाल उतार रहे हैं ताड़ी
  • 100 से अधिक जगह सीधे ताड़ी बेच रहे टैपर

डुमरांव में सात और नावानगर में छह नीरा संग्रहण सह बिक्री केंद्र कागजों पर : जीविका के जीविकोपार्जन विशेषज्ञ संजय सिंह पटेल बताते हैं कि ताड़ और खजूर के पेड़ से जो ताजा रस निकलता है, उसे नीरा कहते है। इसमें 84% पानी के अलावा कैल्शियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, आयरन, जिंक, विटामिन बी, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।

वहीं चन्दन कुमार, प्रबंधक, कृषि, जीविका के अनुसार जिले में कुल दो नीरा उत्पादक समूह खोला गया है। एक समूह में 28 सदस्य हैं। डुमरांव में सात और नवानगर में छह नीरा संग्रहण सह बिक्री केंद्र बनाए गए हैं। हालांकि भास्कर ने जब इस दावे की पड़ताल की तो नावानगर और डुमरांव में ऐसे कोई काउंटर नहीं मिले। चौगाई में जो काउंटर मिला उससे अलग हटकर ताड़ी बेचा जा रहा था।

बासी या पुरानी ताड़ी पीने से खराब हाेता है लिवर
शराब ही नहीं, फरमेंटेड (पुरानी या बासी) ताड़ी भी लीवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है। इसे पीकर मरीज अमीबिक लीवर एबसेस से पीड़ित हो रहे हैं। इनमें करीब दो फीसदी मरीज की मौत हो रही है। इसमें लीवर में मवाद हो जाता है। इसके बाद मरीज को बुखार, पेट में दर्द, सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण मिलते हैं।

आईजीआईएमएस में इलाज के लिए आये इस बीमारी से पीड़ित 198 मरीजों पर रिसर्च किया गया। इनमें 78 फीसदी मरीज ताड़ी पीने वाले थे। 85 फीसदी कुपोषण के भी शिकार थे। पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार झा ने कहा कि शुद्ध ताजा ताड़ी कब्ज, एनीमिया, टीबी जैसी बीमारियों में फायदेमंद है। स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं है।

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