कवायद:पूर्व की मिट्‌टी जांच की नहीं मिली रिपोर्ट,फिर लिये जाएंगे12200 नमूनें

बक्सर9 दिन पहले
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खेत में काम करते किसान। - Dainik Bhaskar
खेत में काम करते किसान।

जिले में किसानों को उन्नत तरीके से खेती करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उसमें से किसानों की मिट्टी की जांच भी एक है। जिसके कारण किसान ठगा सा महसूस करते हैं। जागरुकता के अभाव में प्रत्येक वर्ष किसान अविवेक पूर्ण तरीके से अपने खेतों में उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। जिसका परिणाम उत्पादन पर पड़ता है। इसके साथ ही उत्पादित होने वाले अनाज पर भी पड़ता है।

जिसके खाने से स्वास्थ्य पर व्यापक रूप से असर पड़ता है। किसान अजय कुमार सिंह ने बताया कि किसान सलाहकार द्वारा मिट्टी का नमूना तो ले जाया जाता है परंतु उस मिट्टी की रिपोर्ट नहीं मिलती है। जिससे यह पता नहीं चल पाता है कि आखिर खेत में कौन सा उर्वरक कितनी मात्रा में डाली जाए। यह केवल किसानों को बरगलाने के अलावा कुछ नहीं है। जब मिट्टी की जांच का रिपोर्ट ही नहीं दिया जाता है तब मिट्टी की जांच कराने से क्या फायदा।

नतीजा - उर्वरक का अधिक छिड़काव करते हैं किसान
जिले में जब यूरिया की किल्लत होती है तो प्रायः यह कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मियों से सुनने को मिलता है कि किसान जरूरत से अधिक यूरिया का छिड़काव करते हैं। आखिर किसान करे भी तो क्या करे। मिट्टी की जांच कागजों में होती है। जबकि धरातल पर मिट्टी को किसानों के आलावे कोई पूछने वाला नहीं है।

आगे क्या - 55 गांवो के मिट्टी के नमूनों की होगी जांच
इस वर्ष जिले के 55 गांव की मिट्टी की जांच की जाएगी। प्रत्येक प्रखंड से 5 गांव की मिट्टी की जांच की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में मिट्टी जांच के लिए कुल 12 हजार 200 मिट्टी का नमूना संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। सहायक निदेशक रसायन वसुंधरा ने जिले के सभी बीएओ, कृषि समन्वयक, सहायक तकनीकी प्रबंधक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधकों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है। जिले में मिट्टी जांच के लक्ष्य प्राप्ति को लेकर कुल 55 गांवों का चयन किया ।

12200 नमूने की जांच कर दी जाएगी रिपोर्ट
इन गांवों में किसानों के खेत से कुल 12200 मिट्टी का नमूना संग्रहण किया जाएगा। सहायक निदेशक रसायन ने स्पष्ट रुप से कहा कि हर हाल में इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेना है। कहा कि मिट्टी नमूना का संग्रह कर मिट्टी जांच प्रयोगशाला में ससमय जमा करना होगा। हर नमूनों पर गांव का और किसान का नाम अंकित करना होगा।

12 पैरामिटर पर होगी मिट्टी की जांच
12 पैरामिटर पर मिट्टी की जांच की जाएगी। जिसमें 4 अति सुक्ष्म पोषक तत्वों की जांच होती है। जांच करने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा। हर कार्ड में जांचोपरांत किस किसान के खेत की मिट्टी में कौन सा पोषक तत्वों की कमी है और उसकी भरपाई कैसे होगी इसकी जानकारी दी जाएगी। ताकि किसान अनावश्यक उर्वरक का प्रयोग नहीं करें। इससे किसानों का उर्वरक के खर्चे में कमी आएगी और मिट्टी की सेहत भी बनी रहेगी। अंधाधुंध उर्वरक के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। जिसका प्रभाव उत्पादन पर पड़ रहा है।

रिपोर्ट नहीं मिलने पर कृषि समन्वयक जिम्मेवार
'लैब में जितने किसानों का मिट्टी आती है उन सबकी जांच कर रिपोर्ट तैयार किया जाता है। इसके बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड निर्गत किया जाता है। जिस किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड नहीं मिल पाता है वे अपने कृषि समन्वयक से अवश्य सम्पर्क करें। क्योंकि किसानों से मिट्टी का नमूना कृषि समन्वयक हीं प्राप्त करते हैं।'

-वसुंधरा, सहायक निदेशक रसायन

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