• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Buxar
  • Youth Of Buxar Hoisted The Tricolor On Kalnag Of Himalayas, Success In Climbing Kalanag Peak In 10 Days, Aiming To Climb Everest Further

बक्सर के युवक ने हिमालय के कालानाग पर फहराया तिरंगा:10 दिनों में कालानाग चोटी पर चढ़ने में पाई सफलता, आगे एवरेस्ट पर चढ़ने का लक्ष्य

बक्सर6 महीने पहले

बक्सर के सरेंजा गांव निवासी एक युवक ने हिमालय के कालानाग चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है। जिसकी चर्चा गांव में खूब हो रही है। यह सफलता पाकर उन्होंने न सिर्फ जिले बल्कि बिहार का भी नाम रोशन किया है। पर्वतारोही द्वारा यह कारनामा 10 दिनों की लंबी और कठिन चढ़ाई के बाद कर दिखाया है।

बता दें कि कालानाग हिमालय पर्वतों श्रृंखला में शामिल एक पर्वत की चोटी है, जो कि उत्तराखंड में स्थित है। इसकी चढ़ाई उन्होंने अपने चार अन्य मित्रों के साथ शुरू की और अंततः सफलता प्राप्त की। नंदन बताते हैं कि अब वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं और जल्दी इसकी तैयारियां शुरू कर देंगे।

बता दे कि पर्वतारोही नंदन चौबे सरेंजा निवासी सिंचाई विभाग में कार्यरत अमरनाथ चौबे के पुत्र है। नंदन चौबे चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं । उन्होंने 6,387 मीटर ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की और भारतीय ध्वज फहरा दिया।उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बताया कि उनकी लड़ाई काफी कठिन रही लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि वह इसे अवश्य पूरा कर लेंगे। इसी उम्मीद पर वह आगे बढ़ते गए और अंततः उन्होंने चढ़ाई पूरी की।

शुक्रवार को मिनी एवरेस्ट के लिए चढ़ाई पर जाने से पहले सरेंजा निवासी नंदन चौबे ने बताते हुए कहा उनका लक्ष्य एवरेस्ट चोटी है। वह हर सम्भव इस चढ़ाई को भी पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि पहली बार मे उन्होंने कालानाग की सफलता पाई है। इसके बाद मिनी एवरेस्ट पर चढ़ाई करने जा रहे है। उसके बाद एवरेस्ट चोटी की उड़ान भरेंगे।

जनकारी के मुताबिक कालानाग या काली चोटी, सरस्वती (बंदरपंच) पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है। इसके आसपास के क्षेत्र सरस्वती देवी पर्वत (6316 मीटर) और हनुमान पर्वत (6102 मीटर)है। कालानाग या काली चोटी पर्वत का शाब्दिक अर्थ ब्लैक कोबरा है ।यह रूइनसारा घाटी के करीब है। इस चोटी पर पहली बार 1955 में जैक गिब्सन और दून स्कूल, देहरादून के छात्रों ने फतह पाई थी।