मुस्कुराने वाली तस्वीर का सच जानकर रो पड़ेंगे:4 महीने पहले जहां शादी के गीत गाए, वहां चीख रहा है बैंक मैनेजर की पत्नी का दर्द

हनुमानगढ़6 महीने पहले

एक सप्ताह पहले कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों ने हनुमानगढ़ निवासी बैंक मैनेजर विजय बेनीवाल की गोली मारकर हत्या कर दी। विजय की शादी को 4 महीने भी नहीं हुए थे। पत्नी मनोज भावशून्य हो गई हैं। भास्कर ने विजय के गांव भगवान जाकर उनकी पत्नी से बात की।

भास्कर टीम विजय के घर पहुंची। एक कमरा था, जिसकी एक दीवार पर दिल बनाया हुआ था। दिल के अंदर छपे थे मेहंदी के दो हाथ, जो शादी की अहम रस्म होती है, जिसे छापते हुए दूल्हा-दुल्हन सात जन्मों तक एक- दूसरे का साथ देने का वचन देते हैं। ऊपर लिखा था विजय Weds मनोज, नीचे तारीख 10 फरवरी 2022…कोई भी ये तस्वीर देखे तो मुस्कुराए बिना नहीं रह सकता, लेकिन मैंने देखी तो आंखें भर आईं।

क्योंकि मैंने सिर्फ वो दीवार नहीं पूरा कमरा देखा। कमरा जिसमें शादी के बाद विजय और मनोज ने पूजा की थी। घर की बड़ी महिलाओं ने गीत गाए थे। आज उस कमरे में सिर्फ उन महिलाओं के रोने की आवाज गूंज रही थी। हर आंख नम थी। इन्हीं महिलाओं के बीच बैठी थीं मनोज।

भावशून्य चेहरे के साथ सूजी हुई आंखों से मनोज मोबाइल पर उन पलों को फिर से जीने की कोशिश कर रही थी, जब उसका पति विजय उसके साथ था।

मोबाइल स्क्रीन पर दोनों की वरमाला की फोटो थी। स्क्रॉल किया तो नीचे वाली फोटो में दोनों कश्मीर की वादियों में थे। एक वीडियो, जिसमें विजय मनोज के बालों में तेल लगा रहा था। बेसुध मनोज एक हाथ से आंसू पाेंछे जा रही थी और दूसरे हाथ से मोबाइल स्क्रॉल कर रही थी।

जर्नलिज्म में अब तक के करियर में कभी किसी से सवाल करने में इतना नहीं सोचना पड़ा, जितनी हिम्मत मनोज से सिर्फ ये 1 लाइन कहने में जुटानी पड़ी- मैं पूर्णिमा बोहरा, दैनिक भास्कर से, क्या मैं आपसे बात कर सकती हूं? मनोज ने भावशून्य चेहरे के साथ हां में सिर हिलाया।

रूंधे गले से लड़खड़ाती आवाज में मनोज ने सगाई से लेकर शादी और फिर 2 जून के उस दिन की पूरी कहानी सुनाई। पढ़िए मनोज की जुबानी…

मनोज के बालों में तेल लगाते हुए विजय। मनोज दिनभर ऐसे ही वीडियो और फोटो देखकर विजय के गुजारे दिनों को दोबारा जी रही हैं।
मनोज के बालों में तेल लगाते हुए विजय। मनोज दिनभर ऐसे ही वीडियो और फोटो देखकर विजय के गुजारे दिनों को दोबारा जी रही हैं।

पिछले साल जुलाई में सगाई
विजय तीन साल से कश्मीर में पोस्टेड थे। पिछले साल 11 जुलाई को हमारी सगाई हुई थी। सगाई के बाद फोन पर बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। लगभग हर दिन बात होती थी। इसी साल 10 फरवरी को हमारी शादी हुई। 19 फरवरी को विजय कश्मीर लौट आए। 25 अप्रैल को मुझे भी ले गए थे। हम दोनों वापस गांव आने का प्लान कर रहे थे। विजय कहते थे मेरी नौकरी राजस्थान लगती है तो हम वहां शिफ्ट हो जाएंगे।

3 दिन पहले हुआ था ट्रांसफर
हम सिर्फ पहलगाम व वैष्णो देवी गए थे। विजय को घूमना ज्यादा पसंद नहीं था। उनके ऑफिस से आने के बाद रोज साथ बैठकर फिल्म देखते थे। पहले कश्मीर के काजीगुंड में रहते थे। तीन दिन पहले ही कुलगाम के मोहनपुरा में ट्रांसफर हुआ। ब्रांच घर से 37 किलोमीटर दूर थी, इसलिए वे पास में किराए का मकान लेना चाह रहे थे। पहले हम जून में गांव आने वाले थे, लेकिन मेरा REET का पेपर था, इसलिए विजय ने कहा-जुलाई में गांव चलेंगे।
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मनोज 25 अप्रैल को ही विजय के साथ कश्मीर गई थी। इस दौरान वे पहलगाम और वैष्णोदेवी भी गए थे।
मनोज 25 अप्रैल को ही विजय के साथ कश्मीर गई थी। इस दौरान वे पहलगाम और वैष्णोदेवी भी गए थे।

टारगेट किलिंग से मन में डर बैठ गया था
जब से कुलगाम में टारगेट किलिंग होने लगी, मेरे मन में डर बैठ गया। विजय से कहा तो उन्होंने कहा- यहां कश्मीरी हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है। वे ये भी कहते कि कोई आतंकियों का शिकार होगा- तब सरकार को पता चलेगा कि यहां गैर कश्मीरी हिंदू भी खतरे में हैं।

विजय ने कहा था- ऑफिस से आकर राजस्थान का टिकट बनवा लूंगा
1 जून की रात को मन भारी हो गया था। बहुत डर लग रहा था। रात भर रोती रही। सुबह विजय बाइक लेकर बैंक के लिए निकलने लगे तो मैंने चाबी छीन ली। साफ कह दिया- ऑफिस नहीं जाने दूंगी। फिर विजय ने कहा- चाबी दे दो, लेट हो रहा हूं। चिंता मत कर, जल्दी लौटूंगा। बैंक से आकर राजस्थान की टिकट बनवा लूंगा। इतना कहकर वो चले गए। काश मैंने उन्हें नहीं जाने दिया होता।
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10 फरवरी को विजय और मनोज की शादी हुई थी। उसी दिन उन्होंने मेहंदी के हाथ दीवार पर छापे थे।
10 फरवरी को विजय और मनोज की शादी हुई थी। उसी दिन उन्होंने मेहंदी के हाथ दीवार पर छापे थे।

हनुमानगढ़ आने तक पता नहीं था कि विजय नहीं रहे
विजय के बैंक जाने के बाद उनके कुछ दोस्त घर पर आए और मेरे हाथ से मोबाइल ले लिया। मुझे अनहोनी की आशंका हुई। पूछा तो उनके दोस्तों ने कुछ नहीं बताया। मेरे बार-बार पूछने पर उनके दोस्ताें ने सिर्फ इतना बताया कि विजय के हाथ में गोली लग गई है। चंडीगढ़ इलाज चलेगा और मुझे राजस्थान जाना पड़ेगा।

मैं उनके दाेस्तों के साथ राजस्थान के लिए रवाना हो गई। पूरे रास्ते बेचैनी थी, उनके दोस्तों ने भी कुछ नहीं बताया। हनुमानगढ़ पहुंची तो परिवार वालों ने भी किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। घर के बाहर एक गाड़ी आकर रुकी, जिसमें विजय का शव था। तब पता चला 2 जून को बैंक में घुसकर आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी थी।

विजय तीन साल से कश्मीर में पोस्टेड थे। पिछले साल 11 जुलाई को सगाई और इस साल 10 फरवरी को शादी हुई थी।
विजय तीन साल से कश्मीर में पोस्टेड थे। पिछले साल 11 जुलाई को सगाई और इस साल 10 फरवरी को शादी हुई थी।

बोलीं- सास-ससुर के साथ ही रहूंगी
मनोज कुमारी का पीहर हनुमानगढ़ के पक्का सारना में है। पिता जगदीश ढाका की पेस्टिसाइड की दुकान है। एक छोटा भाई है, वह पढ़ाई कर रहा है। मनोज ने कहा- मैं इसी घर में अपने सास-ससुर के साथ रहूंगी। विजय नहीं है, लेकिन उसकी यादें आज भी इस घर के कोने-कोने में हैं।

पूरे गांव में पसरा है सन्नाटा
7 दिन बाद भी भगवान गांव के लोग सदमे से उबर नहीं पाए हैं। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। विजय के घर के बाहर परिजन और रिश्तेदार बैठे थे। बोले- विजय ने किसी का क्या बिगाड़ा था, उसे गोली क्यों मारी? क्या होगा उसकी पत्नी का, परिवार का?