आस्था:श्रीमद्भागवत साक्षात प्रभु हैं, जहां भक्ति, ज्ञान वैराग्य नित्य विराजता है : राजीवकृष्ण महाराज

दरभंगाएक महीने पहले
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प्रवचन सुनने उमड़ी महिलाओं की भीड़। - Dainik Bhaskar
प्रवचन सुनने उमड़ी महिलाओं की भीड़।
  • जो मां अपने बच्चों के दुर्गुण छिपाए, वह माता बच्चों की हितेषी नहीं शत्रु है

शहर के मिर्जापुर में आशीष व महिपाल परिवार की अाेर से आयोजित श्रीमदभागवत कथा के समापन दिवस पर राजीवकृष्णजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात प्रभु हैं जहां भक्ति, ज्ञान, वैराग्य नित्य विराजता है। शरीर का पोषण भोजन से एवं मन का पोषण भजन से होता है।आनंदमयी जीवन धन से नहीं शांति से हाेता है। उन्हाेंने कहा कि मां ममतामयी होती है। माता ही बालक की प्रथम गुरुकुल है,जो माता अपने बच्चों के दुर्गुण छिपाए वह माता बच्चों का हितेषी नहीं शत्रु है। माता काे बच्चों को संस्कार देना चाहिए। जिसके प्रभाव से बालक खुद की शक्ति व ऊर्जा को जानकर स्वयं आत्मनिर्भर बने। भारत काे ग्रंथ व संत ही महान बनाते हैं। पर्यावरण रक्षणमें गौमाताका बड़ा सहयोग है। राष्ट्र रक्षा का पर्याय गौमाता है। गौ सेवा ही गोपाल सेवा, जगत सेवा एवं जगदीश सेवा का दर्शन कराती है। निष्काम सेवा ही प्रभु सेवा है। आत्मा परमात्मा के मिलन ही महारास है। परमात्मा से मिलने की कथा श्रीमदभागवत है।

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