पिता की गुहार- बेटे की मौत या हत्या, बता दीजिए...:13 साल के बेटे को बाल मजदूरी करने हैदराबाद भेजा, बैग में आई लाश

गया2 महीने पहले

चंद पैसों के लालच में अपने लख्ते जिगर को महज 13 वर्ष में ही शेरघाटी से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैदराबाद के चूड़ी फैक्ट्री में कमाने के लिए भेजने वाले शख्स के घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके बेटे की मौत हो चुकी है। इस दुख की घड़ी में उसके साथ शेरघाटी पुलिस भी न्याय नहीं कर रही है। उसने फरियादियों को बैरंग लौटा दिया है।

यही नहीं पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में भी लिया था, लेकिन रात भर रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया था। उलटा पीड़ित परिवार के बीच ऐसा डर पैदा किया कि वह शव को लेकर घर चले गए और उसका दाह संस्कार भी कर दिया।

हालांकि इस मामले में बाल संरक्षण के मसले पर काम कर रही संस्था सेंटर डायरेक्टर की टीम भाग दौड़ कर रही है। बावजूद इसके घटना के 4 दिन बीत जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं हो सका है।

बाल मजदूरों की ठेकेदार थी महिला

खास बात यह है कि अब तक बाल मजदूरी कराने वालों में पुरुष ही ठेकेदार हुआ करते थे। लेकिन इस मामले में एक महिला बाल मजदूरों का ठेकेदार बन कर सामने आई है। उसी महिला व उसके पति के खिलाफ पीड़ित ने थाने में तहरीर दी है लेकिन केस अब तक दर्ज नहीं हुआ है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उसके बेटे की हत्या हैदराबाद की चूड़ी फैक्ट्री में की गई है।

इधर शेरघाटी थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह का कहना है कि इस मामले में पुलिस अपने स्तर से जांच कर रही है। बाल मजदूरी कराने वाले आने ठेकेदार की तलाश की जा रही है। तहरीर ले लिया गया है। शेरघाटी प्रखंड के चांपी पंचायत के समदा वार्ड सात के रहने वाले सच्चू मांझी और सरोज मांंझी दोनों मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन करते हैँ। इनका कहना है कि दस महीना पूर्व हमारे गांव से आमस थाना क्षेत्र के महुआवां गांव के ठेकेदार सुधीर मांझी व हीरामणी मांझी 15 बच्चों को हैदराबाद ले गया था। उसमें एक मेरा बेटा विलास कुमार भी था। उसने कहा था कि बच्चों को वहां पढ़ाएंगे और कुछ हुनर भी सिखाएंगे। साथ ही 5000 रुपए महीने में देंगे। उनकी बातों पर विश्वास कर गांव के लोगों ने बच्चों को बाहर भेज दिया।

15 बच्चों को हैदराबाद ले गया, 5000 रुपए महीना देने का वादा किया

सच्चू मांझी का कहना है कि पांच हजार हर महीने तो नहीं आए, लेकिन 26 नवंबर की रात करीब साढ़े बजे बेटे विलास का शव घर जरूर आ गया। बताया कि हीरामणी देवी हमारे गांव समदा में नदी किनारे आई और वहीं से फोन कर सूचना दी कि विलास मर गया है। उसका शव बैग में है। आकर ले जाओ नहीं तो नदी में फेंक कर चले जाएंगे। इस हम गांव वाले एकजुट हो कर नदी किनारे पहुंचे और हीरामणी और उसके पति सुधीर और एक गाड़ी चालक को पकड़ शेरघाटी पुलिस को सौंप दिया। विलास के पिता सच्चू मांझी का कहना है कि हमलोंगों ने शव वाला बैग लेने से मना किया तो उसने धमकी दी कि अब जो होना था वो हो गया। अब यदि तुमलोग बैग नहीं लेते हो हैदराबाद में जो अन्य बच्चे हैं उन्हें भी मार दिया जाएगा।

सच्चू मांझी का कहना है कि पुलिस वालों ने उन तीनों को रातभर हिरासत में रखा और हमें तमाम तरह से डराया। जिस पर हम अपने बेटे का शव लेकर घर आ गए और उसका दाह संस्कार भी कर दिया। वहीं उधर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। लेकिन जब यह बात समझ में नहीं आई कि आखिर विलास की मौत कैसे हुई तो पुलिस की शरण में दुबारा पहुंचे।

सच्चू मांझी का कहना है कि चूड़ी फैक्ट्री में काम कर रहे बच्चों ने बताया है कि विलास की मौत पिटाई के कारण हुई है। उसे वहां बेरहमी से पीटा गया है। वह घर आने की जिद्द कर रहा था। लेकिन उसे आने नहीं दिया जा रहा था। इधर सेंटर डायरेक्ट के प्रतिनिधि का कहना है कि इस मामले में हमारा नाम उजागर नहीं करें। क्योंकि बाल मजदूरी कराने वाले ठेकेदार तरह तरह की धमकी देने लगते हैँ। काम करने में बहुत कठिनाई होती है। उन्होंने बताया कि केस कराने के लिए एड़ी चोटी की जोर लगानी पड़ रही है। अब तक थाना की ओर से केस का नंबर मुहैया नहीं कराया गया है।

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