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इतिहास:गया में बनी थी क्रांतिकारियों की समानांतर सरकार

गया2 महीने पहले
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  • 22 अगस्त 1942 को जगलाल महतो के नेतृत्व में इमामगंज थाना पर फहराया था तिरंगा

08 अगस्त, 1942 को मुंबई में गांधीजी सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं को बंद कर दिया गया था लेकिन, अंग्रेजों की सोच के विपरीत क्रांति की आग ठंडी होने की जगह भड़क गयी और गांवों तक लोग उद्वेलित हो गए। 1942 की क्रांति विदेशी शासन से देश को मुक्त कर राष्ट्रीय सरकार की स्थापना करने का लक्ष्य था। गया में डुमरिया के मैगरा व इमामगंज में अंग्रेजों की समानांतर राष्ट्रीय सरकार की स्थापना 22 अगस्त को की गई थी।

गांधी जी के आदर्शों पर आधारित जनता का शासन दो महीने तक चली, जिसका गठन क्रांतिकारी जगलाल महतो ने किया था। इसके दो केंद्र डुमरिया के मैगरा व इमामगंज थे। मैगरा केंद्र के उपाध्यक्ष परमेश्वर सिंह, सचिव कामेश्वर सिंह व कोषाध्यक्ष बनाए गए थे, जबकि इमामगंज के उपाध्यक्ष श्याम गोविंद सिंह, सचिव रामानंद सिंह व कोषाध्यक्ष शीतल वैद्य थे। बाराचट्टी, शेरघाटी, गुरूआ, प्रतापपुर, हंटरगंज सहित अन्य जगहों पर आंदोलन चलाया और गिरफ्तारी से बचने के लिए श्री महतो भूमिगत हो उड़ीसा के पुरी चले गए। बाद में श्री महतो स्वतंत्र भारत में शेरघाटी के पहले विधायक बने।
थाने में फहराया राष्ट्रीय झंडा
पुलिस थाना पहला टारगेट था। इसी क्रम में आंदोलनकारी ने 16 अगस्त को कुर्था, अरवल सहित अन्य क्षेत्रों में पुलिस स्टेशन को लूट लिया। इसी दिन रफीगंज में अंग्रेज सैनिकों की एक टुकड़ी सोन इस्ट बैंक में पदस्थापित कर दी गयी। 22 अगस्त को इमामगंज थाने और डाकघर पर ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक को उतारकर राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया गया।

डर से थाना खाली हो गया था और क्रांतिकारियों की समानांतर सरकार दो माह तक चली थी। 22 अगस्त को ही नवीनगर पुलिस थाने पर झंडा फहराया गया। आंदोलनकारियों के डर से अतरी, गोह, नवीनगर, कुटुंबा, कुर्था, इमामगंज, डुमरिया, गोविंदपुर थाने से पुलिस हटा ली गयी थी। 29 अगस्त को रफीगंज की सड़क तोड़ दी गई ताकि पुलिस समय से न पहुंचें।

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