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चोरी हुई मूर्ति मिली:30 वर्ष पहले बोधगया मठ से चोरी बुद्ध की मूर्ति न्यूयॉर्क म्यूजियम में मिली

गया10 दिन पहले
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  • 21 साल पहले मूर्ति की न्यूयॉर्क से हुई वापसी, पर नहीं लौट सकी बोधगया
  • वर्तमान में दिल्ली में रखी है, डाक्यूमेंटेशन से ही चोरी गई मूर्तियों की घर वापसी संभव

30 साल पहले बोधगया मठ से चोरी गई भगवान बुद्ध की मूर्ति न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन संग्रहालय से वापस मिली, पर वापसी के 21 साल बाद भी बोधगया को उक्त मूर्ति नहीं मिली। बोधगया मठ से चोरी गई भगवान बुद्ध की आठवीं सदी की 3.5 फीट ऊंची बलुआ पत्थर की मूर्ति को वापस लाने में सफलता मिली।

1976 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, पटना सर्किल ने महानिदेशक देबला मित्र की पहल पर बोधगया मठ की मूर्तियों का डाक्यूमेंटेशन करवाया था। इसी के आधार पर चोरी गई बुद्ध की मूर्ति को मार्च 1999 में न्यूयार्क के मेट्रोपॉलिटन संग्रहालय से वापस लाया गया। वर्तमान में यह मूर्ति नई दिल्ली में रखी है और बोधगया वापसी की प्रतीक्षा कर रही है।
कैसे मिली मूर्ति

न्यूयार्क के संग्रहालय ने 1994 के अपने कैटलॉग में बुद्ध की उक्त मूर्ति को प्रदर्शित किया था। सुश्री मित्र ने अमेरिकी प्रशासन से इस मुद्दे को उठाया व प्रमाण के रूप में मठ की मूर्तियों के डाक्यूमेंटेशन को प्रस्तुत कर वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी। यूनेस्को के 1970 कन्वेंशन के आधार पर मूर्ति की वापसी संभव हुई।
बनना था म्यूजियम: पूर्व डीएम संजय अग्रवाल ने मठ परिसर में पड़ी इन मूर्तियों को देखकर इसकी सुरक्षा पर चिंता जताते हुए संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव बीटीएमसी को दिया था। लेकिन फिलहाल इसपर कोई प्रगति नहीं दिखती।

फर्जी तरीके से बिकी
न्यूयॉर्क म्यूजियम के अनुसार, फ्रेंडस ऑफ एशियन आर्ट्स गिफ्ट नामक संस्था ने उक्त मूर्ति को बेचा था। रिपोर्ट के मुताबिक यह फर्जी संस्था बोधगया के मूर्ति तस्करों व सफेदपोशों की पहचान छिपाने के लिए थी, जिसने 1990 में मूर्ति को अमेरिका में बेचा था। संग्रहालय में मूर्ति के नीचे प्राप्ति स्थल में बिहार लिखा गया था।
बुद्ध मूर्ति वापस मिली
वजीरगंज के लोहजरा गांव से 01 जुलाई 2014 को भगवान बुद्ध की मूर्ति चोरी कर ली गई थी, लेकिन लंदन के इंटरनेशनल आर्ट लॉस्ट रजिस्टर के तहत निबंधित कराने के कारण नहीं बिकी और दो साल बाद मूर्ति वापस मिल गई। चार फुट ऊंची भगवान बुद्ध की यह मूर्ति आठवीं सदी की है, जिसमें उन्हें भूमि स्पर्श मुद्रा में दिखाया गया है।

सरसू से चोरी मूर्ति की खोज शुरू

गया के मोहड़ा के सरसू से चोरी गई पालकालीन मूर्ति की खोज शुरू हो गई है। यह गांव ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध जेठियन-तपोवन-बनगंगा के मार्ग पर है। यह मूर्ति बौद्ध देवी तारा की है व नौवीं-दसवीं सदी की है। मूर्ति की ऊंचाई 105 सेमी है और काले पत्थर से निर्मित है। मूर्ति आदमकद है और दो भुजी है। इस मूर्ति की चोरी सितंबर 2007 में हुई थी व संबंधित थाना में प्राथमिकी भी दर्ज करवाई गई थी। इस मूर्ति की खोज के लिए व वापसी के लिए इतिहासकार दीपक आनंद ने आर्ट लाॅस्ट रजिस्टर को सूचित कर दिया है।

क्या है यूनेस्को कन्वेंशन 1970

यूनेस्को के 1970 कन्वेंशन के मुताबिक 1970 व उसके बाद की चोरी की मूर्तियों की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती। अगर ऐसा होता है, तब प्रमाण प्रस्तुत करने पर उसे वापस करना होगा। इसके लिए डाक्यूमेंटेशन जरूरी है।

कैसे पकड़ी जाती है मूर्ति
लंदन में स्थापित आर्ट लॉस्ट रजिस्टर संस्था इसका डाटाबेस तैयार करती है। रजिस्टर्ड मूर्तियों को रजिस्टर संख्या देता है। सौ से अधिक ऑक्शन संस्था इसके सदस्य हैं। मूर्ति चोरी के बाद इसकी सूचना रजिस्टर संस्था को दी जाती है। तस्कर जब खरीददारों से संपर्क करता है, तब वे लॉस्ट रजिस्टर के डाटाबेस को खंगालते हैं। जानकारी मिलने के साथ ही मूर्ति की बिक्री नहीं होती।

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