पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

यात्रा वृत्तांत:टूरिज्म में मिला एडवेंचर, लगातार चार खतरनाक दर्रों को पार कर पहुंचे मनाली

बोधगया12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • आज शुरू करेंगे गया-लेह-मनाली बाइक राइडिंग की वापसी यात्रा

आज बुधवार यात्रा के 12वें दिन पहाड़ों से घिरा व कुल्लु घाटी में बसे मनाली पहुंचें। अबतक सभी ने 3448 किमी की यात्रा पूरी कर चुके है। इससे पहले 11वें दिन रूमसे से जिस्पा के लिए निकले। यात्रा काफी रोमांचक थी और खतरे से भरा भी। चार दर्रों को पार कर जम्मू कश्मीर-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर सरचूं पहुंचे और सीमा के दोनों ओर कागजी कार्रवाई पूरी की। यहां तक पहुंचने के दौरान पहला दर्रा तंगलंगला (5328 मी ) आया। उसके बाद हम नीचे पठार की ओर उतरे। आगे बढ़े तो नाकिला दर्रा (4740 मी) और फिर लाचूंग ला (5059 मी) पार करते हुए हम सरचू पहुंचे।

आगे बारालछाला दर्रा (4891 मी) को पार करके जिस्पा पहुंचे जो की हिमाचल प्रदेश में है। अब नजारे बदल गए थे, अब पहाड़ों पर हरियाली दिख रही थी। यात्रा में शामिल साॅफ्टवेयर इंजीनियर राजीव रंजन सिंह ने उक्त जानकारी शेयर की। उनके साथ गया के ही कम्प्यूटर टीचर जयप्रकाश, बिजनेसमैन श्रवण कुमार व केमिस्ट विक्रांत कुमार अग्रवाल हैं।

यात्रा के काॅर्डिनेटर व क्लब बुलेट बाबाज आॅफ बोधगया (मगध राइडर्स क्लब) के संस्थापक रवि नायक ने बताया कि 10 जुलाई को गया से शुरू यात्रा हुई थी। दूसरे दिन लखनऊ से दिल्ली, तीसरे दिन 12 जुलाई को दिल्ली से जम्मू, चैथे दिन जम्मू से श्रीनगर और पांचवें दिन श्रीनगर से कारगिल की यात्रा शुरू की। छठे दिन कारगिल से लेह पहुंचें। सातवें दिन लेह में बाइक की सर्विसिंग व आराम करने के बाद 9वंें दिन पैंगांग झील व नूब्रा घाटी, लेह से 11 वें दिन जिस्पा, 12वें दिन मनाली के बाद 13वें दिन दिल्ली होते गया की वापसी यात्रा शुरू होगी।

चांग ला दर्रा व देखा बौद्ध मोनास्ट्री

यात्रा के 10वें दिन लेह न लौट कर प्लान बदल दिया और रूमसे में ठहरा। चांग ला दर्रा (5391 मी) होते आगे की यात्रा शुरू की। रास्ता बहुत खराब था, फिर भी आगे बढ़े। कारु चेक पोस्ट पर अपने यात्रा परमिट की कॉपी दी और सीधा हेमिस मोनास्ट्री गया। यह बहुत ही खूबसूरत है व तिब्बत के ड्रुक पा बौद्ध परंपरा से जुड़ा है। तिब्बती स्थापत्य शैली में बना यह मठ बौद्ध जीवन और संस्कृति को प्रदर्शित करता है। मठ में जून के आखिर में या शुरूआत जुलाई में भारी सख्‍ंया में लोग आते हैं और गुरू पद्मसंभव के लिए वार्षिक उत्‍सव का आयोजन करते हैं। यह धर्म शिक्षा का भी केंद्र है। यहां से आगे लेह-मनाली हाइवे पर लद्दाखी गांव रूमसे की ओर बढ़े और रात्रि पड़ाव किया। 11वें दिन यहां से जिस्पा के लिए निकले।

खबरें और भी हैं...