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  • Apart From The Scholars Of 25 Countries, 50 Scholars From The Country Will Participate In The Conference, All The Preparations Were Completed.

तैयारी:कांफ्रेंस में 25 देशों के स्कॉलरों के अलावा देश के 50 स्कॉलर लेगें हिस्सा, सभी तैयारियां हुईं पूरी

बोधगया22 दिन पहले
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  • आज से एमयू जूलॉजी विभाग में मॉड्युलेटिंग द एनवायरमेंट विद माइक्रोब्स पर सातवां इंटरनेशनल ई-कांफ्रेंस शुरू

माइक्रोब्स अर्थात सूक्ष्मजीव मिट्टी के स्वास्थ्य के संकेतक हैं। वे इसकी संरचना को स्थिर करते हैं, पौधों द्वारा पोषक तत्वों को ग्रहण करने में सक्षम बनाते हैं, कीटों और बीमारियों को नियंत्रित करते हैं, कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हैं। इंडियन नेटवर्क फॉर स्वॉयल कंटेमिनेशन रिसर्च के सहयोग से मगध विवि के जूलॉजी विभाग में सोमवार 07 नवंबर से पांच दिवसीय इंटरनेशनल ई-कांफ्रेंस का आयोजन हो रहा है, जिसका मुख्य थीम है मॉड्युलेटिंग द एनवायरमेंट विद माइक्रोब्स।

विभागाध्यक्ष प्रो सिद्धनाथ प्रसाद यादव दीन ने बताया कि 07 से 11 नवंबर तक इसका आयोजन होगा, जिसमें उनका विभाग कांफ्रेंस का सह आयोजक है। इसमें 25 इंटरनेशनल स्पीकर के अलावा लगभग 50 भारत के स्पीकर होगें। सह संरक्षक में मगध विवि के जूलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो एसएनपी यादव दीन के अलावा ऑर्गनाइजिंग उपाध्यक्ष डा रौशन कुमार हैं।

इनका है सह आयोजन में भागीदारी
इंडियन नेटवर्क फॉर स्वॉयल कंटेमिनेशन रिसर्च इसका आयोजन कर रहा है व पीजी डिपार्टमेंट जूलॉजी मगध विवि, डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी दिल्ली विवि, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज दिल्ली, भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लायड साइंसेज, दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज दिल्ली, मैत्रेयी कॉलेज, मिरांडा हाउस, दिल्ली विवि जूलॉजी विभाग, शिवाजी कॉलेज, एसजीटीबी खालसा कॉलेज, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली, श्री वेंकेटश्वर कॉलेज दिल्ली, सीएमपी कॉलेज इलाहाबाद विवि, कोल्हान विवि झारखंड और केआईआईटी विवि उड़ीसा व गुरूग्राम का फिक्सजेन प्राइवेट लिमिटेड सह आयोजक हैं।

प्रमुख वैज्ञानिकों के शोधपत्र पर होगा मंथन
इस कांफ्रेंस में जर्मनी के प्रो केनेथ टीमिस, कार्डिफ विवि वेल्स की हिलेरी लैपिन स्कॉट, न्यूजीलैंड के प्रो स्टीफन क्रैग कैरी, जर्मनी के एंडरेस बीतहोल्ड, उरूग्वे की पावलो स्कावोने, नीदरलैंड के हॉक मिड्ट, अमेरिका के ओकलाहोमा विवि के प्रो जिझांग झाउ, स्पेन के जुआन लुइस रामोस, नेपाल के देव राज जोशी, श्रीलंका के कोसल सीरीसेना, नेपाल की तीस्ता प्रसाई जोशी सहित अन्य विदेशी वैज्ञानिक अपने शोधपत्र पढ़ेगें, जिसपर गंभीर मंथन होगा।

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