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तर्पण भी मुश्किल:फल्गु सूखी है, इसलिए 20 फीट गहरे गड्‌ढों में 5-5 मिनट में तर्पण करा रहे पंडे, गहराई से निकले 100 ML पानी की कीमत 10 रुपए

गया2 महीने पहलेलेखक: दीपेश

गया जिले की फल्गु नदी में पिंडदान का खास महत्व है। मान्यता है कि इसके पानी में तर्पण से 21 पीढ़ी के पितर तृप्त और मुक्त होकर ब्रह्मलोक प्राप्त करते हैं। अब आज इस नदी की स्थिती पर नजर डाल लेते हैं। गर्मी की दस्तक से पहले ही फल्गू का जलस्तर 20 फीट नीचे चला गया है। सवाल आस्था का है, लिहाजा पानी की तलाश में लोग जमीन में 20 फीट गड्ढा खोदते हैं, फिर अंदर उतरकर तर्पण करते हैं। पंडे 5 मिनट में ही तर्पण करा दे रहे हैं। गहराई से निकले एक चुक्का (100 ML) पानी के लिए पंडे 10 रुपए ले रह हैंं।

फल्गू नदी में 20-20 फीट के 3 गड्‌ढे
सूखी फल्गू नदी से पानी निकालने के लिए 20-20 फीट के 3 गड्‌ढे हैं। स्थानीय बोलचाल की भाषा में इन्हें चुआड़ी कहते हैं। एक चुआड़ी सार्वजनिक है, जिसमें से पानी निकलता ही नहीं। जिन दो चुआड़ियों से पानी निकलता है, उनपर पंडों का कब्जा है। पिंडदान करने लोग यहां सपरिवार पहुंचते हैं। जल अर्पण के लिए कम से कम दो चुक्का पानी की जरूरत पड़ती है। एक परिवार में 5 लोग के हिसाब से ही जोड़िए तो 2-2 चुक्का प्रति व्यक्ति के हिसाब से उस परिवार को 100 रुपए तो सिर्फ पानी के देने पड़ते हैं। दूसरी रस्म पूरी कराने के लिए पंडों की दक्षिणा अलग से देनी होती है।

पतली धारा बन गई 235 KM लंबी नदी
इसी नदी की कुल लंबाई बिहार में 235 किलोमीटर है। गया के पूर्वी तट पर अब सिर्फ पतली-सी धारा बह रही है। गर्मी शुरू होते ही यह भी सूखने लगी है। नदी में ही शवदाह होने के कारण यह भरती जा रही है। कफन और लकड़ी की दुकान भी नदी में ही मिल जाएगी। फल्गू में दूर-दूर तक पानी नजर नहीं आता। इसकी वजह से पिंडदानियों और उनके ब्राह्मणों के सामने संकट पैदा हो गया है। अभी चुआड़ी के अंदर जाकर ही पिंडदानी पिंडदान की करते हैं।

सीता के शाप ने फल्गू को सुखा दिया
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम यहां पिता राजा दशरथ का पिंडदान करने आए थे। उस समय जब राम-लक्ष्मण पिंड सामग्री लेने गए, तब छायारूप में महाराज दशरथ ने उपस्थित हो सीता से शुभ मुहूर्तं में पिंड की याचना और भोजन की मांग की। पिंड सामग्री के अभाव में दशरथ के कहने पर सीता ने महानदी की उपस्थिति में बालू का पिंड बनाकर दशरथ को दान किया था। सीता ने जब पिंडदान की बात राम को बताई तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ। वे नाराज हो गए। सीता ने फल्गु नदी से गवाही देने की विनती की, लेकिन फल्गु नदी राम के डर से मुकर गई। इससे क्रोधित सीता ने फल्गु को श्राप दिया था कि वह गया नगर में अपना पानी खो देगी।

2 साल में बनेगा रबर डैम, तब रहेगा पानी
गया के जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया- विष्णुपद मंदिर के देवघाट के पास फल्गु नदी में 350 मीटर चौड़ा और 650 मीटर लंबाई में रबर डैम बनाया जा रहा है। इसमें 2 फीट पानी रखने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार की यह बड़ी योजना है। इसके साथ ही नदी के दोनों तरफ सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इससे पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।

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