आस्था:सोलहवेदी के अंतिम पांच पद पर पिंडदान कर अपने पूर्वजों को दिलाया स्वर्ग लोक

गया2 महीने पहले
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सोलहवेदी के पास सभामंडप में पिंडदान करते तीर्थयात्री - Dainik Bhaskar
सोलहवेदी के पास सभामंडप में पिंडदान करते तीर्थयात्री
  • गयाश्राद्ध के नौवें दिन पिंडदानियों ने अगस्त्य पद, मंतड्गपद, क्रौंच्यपद, इंद्रपद, व कश्यप पद पर किया श्राद्ध
  • आज सीताकुंड में पिंडदान कर दान करेंगे सौभाग्य पिटारी, इस वेदी पर बालू से पिंड देने का है विधान
  • हर वेदी पर श्राद्ध का विशेष महत्व, पिंडदान के बाद तीर्थयात्रियों ने गजकर्णिका के पास दूध से किया तर्पण
  • पिंडदानियों ने सोलहवेदी से उत्तर कनकेश्वर, केदारेश्वर, नरसिंह तथा वामन भगवान का किया दर्शन-पूजन

पितृपक्ष की ‘अष्टमी तिथि’ बुधवार को त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वाले तीर्थयात्रियों ने सोलहवेदी के अंतिम पांच ‘पद’ पर पिंडदान कर पूर्वजों को स्वर्ग लोक दिलाया। आज के श्राद्ध के साथ ही चार दिनों से चल रहे सोलहवेदी पर कर्मकांड पूरा हुआ। तीर्थयात्रियों ने गयाश्राद्ध के नौवे दिन अगस्त्य पद, मतंड्गपद, क्राच्यपद, इंद्रपद व कश्यप पद पर पिंडदान कर पितरों की मुक्ति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की।

विधि-विधान के साथ श्राद्ध का कर्मकांड पूरा कर पिंड को इन्हीं वेदियों पर स्पर्श कराते हुए गर्भगृह में जाकर विष्णुचरण पर छोड़ा। बता दें कि सोलहवेदी पर पिंडदान के कारण पिछले चार दिनों से विष्णुपद में पिंडदानियों की अच्छी-खासी भीड़ रही।

सोलहवेदी पर जगह के अभाव के कारण पिंडदानियों ने विष्णुपद के आसपास ही पिंडदान के कर्मकांड को पूरा किया, फिर गजकर्णिका के पास दूध से तर्पण किया, साथ ही साेलहवेदी के उत्तर कनकेश्वर, केदारेश्वर, नरसिंह तथा वामन भगवान का दर्शन व पूजन किया।

सभी वेदियों पर पिंडदान का अलग महत्व
आचार्य नवीन चंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि सभी वेदियों पर पिंडदान का अलग-अलग महत्व है। पहले यह सभी वेदियां गया के आसपास थी। एक वर्ष में पिंडदान का कर्मकांड पूरा होता था। अब यह विष्णुपद के पास है। उन्होंने बताया कि इन्द्रपद पर श्राद्ध कर तीर्थयात्रियों ने पितरों को स्वर्गलोक दिलाया। अगस्त्य पद, मतंड्गपद, क्रॉच्यपद पर श्राद्ध से पितरों को ब्रह्मलोक मिला।

नौवीं तिथि यानी आज सीताकुंड में करेंगे पिंडदान
त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वाले तीर्थयात्री नौवें दिन विष्णुपद के सामने फल्गु के पूर्वी तट पर सीताकुंड और रामगया में श्राद्ध करेंगे। इस वेदी पर सौभाग्यवती स्त्री द्वारा बायें हाथ से बालू के तीन पिंड देने के बाद सौभाग्य पिटारी का दान करेंगे। आचार्य ने कहा कि इससे सिद्ध होता है कि पुत्र के अलावे पुत्रवधु अर्थात स्त्री को भी श्राद्ध करने का हमारे धर्मशास्त्र में पूर्ण अधिकार है।

मोक्षदायिनी फल्गु में तर्पण करते तीर्थयात्री
मोक्षदायिनी फल्गु में तर्पण करते तीर्थयात्री

अब 3 व 5 दिन वाले ही गया आएंगे तीर्थयात्री
विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शंभु लाल विट्‌ठल ने बताया कि नौवी तिथि से भी कई पिंडदानी तीन व पांच दिन के श्राद्ध के लिए गयाधाम आएगें। इसमें उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के तीर्थयात्रियों की संख्या अच्छी रहेगी। उन्होंने बताया कि अब विष्णुपद मंदिर से तीर्थयात्रियों की भीड़ छटेगी। गुरुवार को सीताकुंड में जाकर पिंडदानी श्राद्ध का कर्मकांड करेंगे। पितृपक्ष के मात्र सात दिन शेष बचे है।

पितरों के निमित श्राद्ध करते पिंडदानी
पितरों के निमित श्राद्ध करते पिंडदानी
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