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विश्व स्वास्थ्य दिवस:बेहतर स्वास्थ्य सेवा पाना है नागरिक अधिकार, दरभंगा की ऋद्धि ने अपने शोधपत्र में दी जानकारी

बोधगया15 दिन पहले
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स्वास्थ्य के अधिकार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शामिल किया गया है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है। यह राज्य सूची में शामिल है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सभी जिम्मेदारियों को राज्य द्वारा पूरा किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य का अधिकार एक व्यापक शब्द है, जिसमें आधिकारिक जिम्मेदारी, उपलब्ध सेवाओं तक आसान पहुंच और उचित तरीके से आवश्यक सेवाओं का प्रत्यक्ष वितरण शामिल है। हैदराबाद के सिम्बायोसिस लाॅ स्कूल से लाॅ कर रही दरभंगा की ऋद्धि कश्यप ने अपने प्रकाशित शोधपत्र में उक्त बातें कही हैं।

उसने बताया कि यह वर्तमान समय के चुनौतीपूर्ण मुद्दों में से एक है। ग्रामीण आबादी तक स्वास्थ्य की बुनियादी ढांचे और उनकी आसान पहुंच प्रमुख समस्या है। ज्यादातर लोग दूरदराज के गांवों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनमें विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं और इसकी आसान पहुंच का अभाव है। अधिकांश लोग सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों व उपलब्ध विभिन्न सेवाओं और योजनाओं से अनजान हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और जनशक्ति का अभाव भारत में स्वास्थ्य के अधिकार के लिए एक और महत्वपूर्ण चुनौती है। स्वास्थ्य सेवा विभाग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक क्षेत्रों, निजी क्षेत्रों और गैर-सरकारी संगठनों के हाथों में है। सुश्री कश्यप ने कई उद्धरणों व केस स्टडी का जिक्र अपने शोधपत्र में किया है।

बच्चों का एक बड़ा प्रतिशत कुपोषण का शिकार
बच्चों का एक बड़ा प्रतिशत कुपोषण से प्रभावित है। पोषक तत्वों और विटामिन की यह कमी स्वस्थ आहार की कमी के कारण है। अक्सर इससे प्रभावित बच्चे रोगग्रस्त हो जाते हैं और जीवन भर बीमार रहते हैं। साथ ही, इस देश में कई संक्रामक रोगों जैसे हेपेटाइटिस, मलेरिया, एड्स आदि आसानी से युवाओं और बच्चों के बीच फैल जाता है। उचित स्वच्छता का अभाव कई स्वास्थ्य मुद्दों का सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख कारण है। इनके अलावा पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन महत्वपूर्ण कारक है।

जलवायु परिवर्तन व प्रदूषण है समस्या
खराब स्वास्थ्य के लिए मुख्य रूप से प्रदूषण (वायु, जल और भूमि), खराब स्वच्छता, कृषि और औद्योगिक प्रदूषण और जैव रासायनिक प्रदूषक हैं। इन कारकों ने लोगों के स्वास्थ्य की गुणवत्ता को खराब कर दिया है। जल निकायों में सीवेज के अनुचित निपटान, कचरे के खराब उपचार के परिणामस्वरूप विभिन्न बीमारियां और विकार हो गए हैं।

इसके अलावा, पर्यावरणीय स्वास्थ्य के खतरों को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह जनता को बड़े स्तर पर प्रभावित करता है। सभी लोग अपने आसपास की सफाई और रखरखाव के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं।

सरकार ने की है पहल

सरकार ने हेल्थ कार्ड और आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं की पहल की हैं। सरकारी व गैर सरकारी संस्था समय-समय पर कैंप लगाकर, मोबाइल क्लिनिक से स्वास्थ्य सेवा सुदूर इलाकों में उपलब्ध करा सकते हैं। आम जनता भी अपनी और अपने पर्यावरण की देखभाल करने के लिए जिम्मेदार है।

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