मनमानी:चिकित्सा पदाधिकारी के आगे सीएस का आदेश विफल

गया10 दिन पहले
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गया के सिविल सर्जन का आदेश भी विभिन्न प्रखंडों में तैनात प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों पर बेअसर है। यही कारण है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुकुरमुत्ता की तरह अवैध नर्सिंग होम और अस्पतालों का बेखौफ संचालन हो रहा है। और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका महज मूकदर्शक की बनकर रह गई है। जानकारी हो कि 7 जनवरी के अंक दैनिक भास्कर के द्वारा गया शहर के तीन नर्सिंग होम में मरीजों की जान से हो रही खिलवाड़ के बारे में खबर प्रकाशित की गई थी।

गया के सिविल सर्जन डॉ रंजन कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उक्त तीनों अस्पतालों की जांच का जिम्मा नगर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सौंपा था। सिविल सर्जन द्वारा दिए गए आदेश में जल्द से जल्द तीनों नर्सिंग होम की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। बावजूद 2 सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।

क्या है मामला?

जिले में अवैध नर्सिंग होम व अस्पतालों के संचालन के विरुद्ध दैनिक भास्कर द्वारा संचालित अभियान के तहत पिछले दिनाें शहर के बीचोंबीच पॉश इलाका माने जाने वाले एपी कॉलोनी क्षेत्र में संचालित तीन अस्पतालों में पड़ताल की गई थी। इस दाैरान तीनाें अस्पतालाें में स्वास्थ्य संबंधी कानूनाें की धज्जियां उड़ते दिखी।

इतना ही नहीं गया नगर प्रखंड के सामने संचालित रिद्धि-सिद्धि नर्सिंग होम में उपस्थित संचालक द्वारा बिना डाेनर के खून उपलब्ध कराने के लिए सात हजार रुपए प्रति यूनिट की मांग की गयी थी। दूसरी ओर एपी कॉलोनी से चंदौती ब्लॉक जाने वाले मुख्य रास्ते पर संचालित गया सेंट्रल हॉस्पिटल और आशा सिंह माेड़ पर संचालित रेनबाे हाॅस्पीटल में भी मरीजाें की जान से खिलवाड़ हाेते दिखा।

कहते हैं अधिकारी

अस्पतालों की जांच के लिए नगर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। अभी तक जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट भेजने के लिए फिर से रिमाइंडर किया जा रहा है।
डॉ. रंजन कुमार सिंह, सिविल सर्जन, गया

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