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जानकारी:कोरोना से मुक्ति को ‘उं मणि पद्मे हूं’ का एक हजार मंत्र जाप करें

गयाएक महीने पहले
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  • जन्मदिवस के मौके पर 14वें दलाई लामा ने धर्मशाला से जारी किया संदेश

बुद्धत्व प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील व्यक्ति को बोधिसत्व कहते हैं। अनेक जन्मों की साधना के बाद बुद्धत्व की प्राप्ति होती है। इस साधना की शुरूआत बोधिचित्त ग्रहण से होती है। मैं आज भी बोधिचित्त जाग्रत करने का अभ्यास करता हूं।

14वें दलाई लामा ने अपने जन्मदिन के मौके पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से जारी संदेश में उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि बुद्ध वही बन सकता है, जिसमें बोधिचित्त जाग्रत होने से प्रज्ञा व उसके साथ महाकरूणा हो। उन्होनें प्रातः 5.44 मिनट पर 03ः43 सेकेंड का वीडियो द्वारा संदेश जारी किया आगे कहा, संकटकाल है, कोविड-19 के कारण सामूहिक पूजा न करें। एक हजार बार उं मणि पद्मे हूं का जाप करें। यह मंत्र अवलोकितेश्वर के नजदीक ले जाएगा व परेशानी से मुक्त करेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा, वे 108 से 110 साल तक जीवित रहेगें। बोले, उनके भी गुरू अवलोकितेश्वर हैं, वह उनके शिष्य हैं।

प्राणियों का कल्याण है अवलोकितेश्वर का गुण
बोधिसत्व अवलोकितेश्वर सभी प्राणियों को मुक्त करने के लिए बुद्धत्व के योग्य होते हुए भी उसे त्याग दिया था। उनका उद्देश्य है-सभी प्राणियों के लिए निर्वाण सुलभ करना, सही की सहायता करना, सभी प्रकार की विपत्तियों से बचाना, अनंत करूणा की बारिश करना। जीवों की करूणा को यदि अकुशल कर्म या पाप भी करना पड़े तो बोधिसत्व अवलोकितेश्वर उससे घबराते नहीं। वे किसी को अप्रसन्न करने से बेहतर नरक जाना पसंद करते हैं।

1935 में हुआ जन्म
दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को पूर्वोत्तर तिब्बत के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।  उन्हें मात्र दो साल की उम्र में 13वें दलाई लामा थुबटेन ज्ञायत्सो का अवतार बताया गया था। छह साल की उम्र में ही मठ के अंदर उनको शिक्षा दी जाने लगी। परंपरानुसार, दलाई लामा अवलोकितेश्वर के अवतार माने जाते हैं। 1989 में उन्हें विश्व शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वायरस से मुक्ति के बताए उपाय
इससे पहले धर्मशाला में चीन के श्रद्धालुओं को कोरोना से मुक्ति के लिए आर्य तारा के मंत्र के जाप को कहा था। 29 जनवरी 2020 को उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ खुद भी उक्त मंत्र ऊं तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा का जाप किया व कहा, कि चीन सहित अन्य देशों के लोग इस आपदा से न घबराएं, शांति व स्वास्थ्य के लिए उक्त मंत्र का जाप करें।

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