पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Gaya
  • Dwarko Sundrani Passes Away In Bihar Bodh Gaya | Everything You Need To Know About Dwarko Sundran

नहीं रहे द्वारिको सुंदरानी:जन्म पाकिस्तान में, लेकिन विनोबा के कहने पर बोधगया को बनाई कर्मस्थली, समन्वय आश्रम से बदली वंचितों की तकदीर

पटना/गया3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
द्वारिको सुंदरानी की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
द्वारिको सुंदरानी की फाइल फोटो।
  • 99 वर्ष की आयु में पटना के निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस, बहुत दिनों से थे बीमार
  • आज शाम 4 बजे बोधगया स्थित समन्वय आश्रम में राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

बोधगया स्थित समन्वय आश्रम के संचालक गांधीवादी विचारक द्वारिको सुंदरानी नहीं रहे। 99 वर्ष की आयु में उन्होंने मंगलवार की रात राजधानी पटना के निजी अस्‍पताल में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को समन्वय आश्रम परिसर के नेत्र ज्योति अस्पताल के हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। आज शाम 4 बजे समन्वय आश्रम में उनका अंतिम संस्कार होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर दुख जताते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया है।

महात्मा गांधी, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण के सान्निध्य में रहकर आजीवन समाज सेवा करने द्वारिको सुंदरानी को इलाके के लोग गरीबों का मसीहा मानते थे। उनके निधन से हर तरफ शोक की लहर है। सुंदरानी जी का जन्म छह जून 1922 को पाकिस्तान के करांची व सिंध प्रांत के बीच लरकाना के मानजन गांव में हुआ था। उन्होंने बोधगया को अपनी कर्मभूमि बनाया था।

सुंदरानी जी ने अपना पूरा जीवन महादलित और समाज के अंतिम पायदान पर रहे व्यक्तियों के उत्थान में लगा दिया। महादलित और मुसहर समाज के बच्चों के लिए वे आश्रम परिसर में आवासीय विद्यालय चलाते थे। बोधगया के पास उन्होंने बगहा में आश्रम बनाया था। वे पिछले चार दशक से गुजरात के भंसाली ट्रस्ट के महेश भाई भंसाली से मिलकर बोधगया में नि:शुल्क नेत्रदान शिविर के संचालन में सहयोग दे रहे थे। इस अस्पताल से लाखों आंखों को रोशनी मिल चुकी है। सुंदरानी जी 1984 से 1985 तक महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सचिव पद पर भी पदस्थापित थे।

बगहा आश्रम में दर्शन के लिए रखा गया सुंदरानी जी का पार्थिव शरीर।
बगहा आश्रम में दर्शन के लिए रखा गया सुंदरानी जी का पार्थिव शरीर।

जमुनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित
जमुनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित द्वारिको सुंदरानी गया में समन्वय आश्रम और समन्वय विद्यापीठ के बच्चों को शिक्षित कर जीवन जीने की कला सिखाते थे। समन्वय आश्रम की स्थापना भूदान आंदोलन के जनक विनोबा भावे ने की थी। आश्रम परिसर और जिले के मोहनपुर प्रखंड के बगहा गांव में समन्वय विद्यापीठ में मुसहर और भोक्ता जाति के बच्चे पढ़ते हैं। आवासीय समन्वय विद्यापीठ में पढ़ाई कर रहे बच्चे जिले के सुदूर ग्रामीण सुदूर क्षेत्र के रहने वाले हैं। दोनों जगहों पर बालवाड़ी से लेकर आठवीं कक्षा तक की नैतिक शिक्षा देकर एक अलग समाज तैयार किया जा रहा है।

महात्मा गांधी की समवाय शिक्षा से बदली तस्वीर
सुंदरानी जी कहा करते थे कि उनके आश्रम में दी जाने वाली शिक्षा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समवाय शिक्षा पर आधारित है। इस शिक्षा का मकसद जीवन बदलना और संस्कार में बदलाव लाना है। सुंदरानी कहा करते थे कि आवासीय शिक्षा बेहतर है। समन्वय आश्रम द्वारा संचालित आवासीय स्कूल के बच्चों की दिनचर्या भी अलग है। प्रतिदिन सुबह चार बजे उठना, उसके बाद योगासन, प्रार्थना, नाश्ता व वर्ग संचालन, सफाई और गौशाला का कार्यक्रम के बाद भोजन, फिर दोपहर विश्राम। शाम में फिर से वर्ग संचालन, संगीत, खेल, प्रार्थना व रात्रि भोजन के बाद विश्राम। इस दिनचर्या से बच्चों के जीवन को संवारा।

विनोबा जी के कहने पर बोधगया आए
सुंदरानी जी का जन्म सिंध के लरकाना में हुआ। हाई स्कूल की पढ़ाई भी वहीं से की। 20 साल की आयु में वे गांधीवादी विचारों के प्रभाव में आए। इसके बाद जिंदगी बदल गई। लोगों के लिए जीने लगे। 1953 में वे विनोबा जी के कहने पर बोधगया आए। 18 अप्रैल 1954 को बोधगया में समन्वय आश्रम की स्थापना हुई। मौन रहकर समाज में क्रांति की मशाल जलाने वाले सुंदरानी जी के निधन से पूरा बिहार मर्माहत है।

गांधीवाद के एक युग का अंत
ग्राम निर्माण मंडल सह बिहार स्टेट गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष प्रभाकर कुमार ने स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ गांधीवादी द्वारिको सुंदरानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से अपूरणीय क्षति हुई है और गांधीवाद के एक युग का अंत हो गया। द्वारिका भाई ने गांधी जी, विनोबा भावे जवाहरलाल नेहरू के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भूदान आंदोलन में भी अपना काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया और बोधगया में समन्वय आश्रम की स्थापना की।

खबरें और भी हैं...