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वेबिनार:कल्पना व चिंतन से ही फिक्शन को मिलता है आधार: कुलपति

बोधगया2 दिन पहले
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  • एमयू के एसएन सिन्हा काॅलेज जहानाबाद में आर्ट ऑफ फिक्शन विषय पर वेबिनार आयोजित

उपन्यासकार, कहानीकार और कवि अपने अनुभवों और कल्पनाशीलता से ही तो रचना कर पाते हैं। आर्ट ऑफ फिक्शन कल्पना का आधार है। जिसके पास जितना बड़ा कल्पना लोक होगा, उसके रचना का संसार उतना ही व्यापक और गहरा होगा। डिजिटल युग की अपनी परेशानी है, किंतु यह युग साइंस फिक्शन के लिए अत्यंत उर्वर है। इसी तरह कोरोना महामारी के संत्रास के दौर से हम गुजर रहे हैं, पर इस महामारी ने लेखकों की कल्पनाशीलता को भी नया आयाम दिया है। उक्त बातें कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद ने एसएन सिन्हा कॉलेज जहानाबाद द्वारा आर्ट ऑफ फिक्शन विषय पर आयोजित वेबिनार में कही।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ साहित्य का ही विषय नहीं है, बल्कि ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मीडिया, वर्चुअल वर्ल्ड, साइंटिफिक दुनिया एवं स्पेस साइंस समेत समाज के विभिन्न पक्षों के लिए आधारभूत अनुभवजन्य आधार देता है। व्यवहार व चिंतन की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है कि स्टोरी राइटिंग व उपन्यास लेखन के लिए ज्ञान के संवर्धन व प्रोत्साहन को आधार देता है।

कल्पना व चिंतन से ही स्टोरी या उपन्यास को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। साइंटिफिक व तकनीकी नॉलेज के लिए विचार की आधारभूत शक्ति चाहिए, जो आर्ट ऑफ फिक्शन से लिया जा सकता है। आज वर्चुअल वर्ल्ड में बहुत कुछ घटित हो रहा है और इससे मीडिया सोशल, मीडिया, इतिहास एवं संपूर्ण रचना संसार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को भी नए सिरे से रचने और सृजन करने का एक नया आधार मिल रहा है। इसके सकारात्मक पक्ष को लेकर बहुत कुछ करने की जरूरत है। रचना की नई प्रक्रिया से जोड़कर जुड़कर विस्तृत फिक्शन को लेखन में आधार बनाने की जरूरत है।

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