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भास्कर एनालिसिस:साढ़े चार साल पहले गेस्ट फैकल्टी का निकला विज्ञापन गलत विज्ञापन व आरक्षण के पेच में फंसी पूरी प्रक्रिया

बोधगयाएक महीने पहलेलेखक: राजीव कुमार
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शिक्षकों की कमी के कारण सरकार के क्वालिटी एजुकेशन के दावे पर शिक्षाविद ही सवाल उठा रहे है। - Dainik Bhaskar
शिक्षकों की कमी के कारण सरकार के क्वालिटी एजुकेशन के दावे पर शिक्षाविद ही सवाल उठा रहे है।

कभी शिक्षा में बिहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया करता था, लेकिन आज उसकी बदहाली राज्य की स्थिति का पोल खोल रही है। सरकार शिक्षा पर कितना ध्यान दे रही है, यह विभिन्न विवि में शिक्षकों के रिक्त पदों से पता चलता है। मगध विश्वविद्यालय के कॉलेजों व स्नातकोत्तर विभागों में शिक्षकों का संकट जारी है। राज्य सरकार के आदेश तथा छात्रसंघों की मांग पर पीजी में पचास फीसदी सीटें तो बढ़ा दी गई, किन्तु शिक्षकों के पद 1977 के बजट के अनुसार स्वीकृत पदों से भी घटकर आधी से भी कम हो गई है।

इस कमी को दूर करने के लिए नवंबर 2017 अर्थात साढ़े चार साल पहले इसके लिए गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति होनी थी, पद विज्ञापित हुए, लेकिन आजतक मगध विवि में इनकी नियुक्ति नहीं हुई। राज्य सरकार के दावे कि विवि व कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, लेकिन शिक्षाविद क्वालिटी एजुकेशन के राज्य सरकार के घोषणा पर ही सवाल खड़ा करते हैं।

430 पदों पर होनी थी नियुक्ति
सरकार द्वारा सृजित 1028 पदों में 147 रिक्त पदों को रेशनलाइजेशन के नाम पर खत्म कर दिया गया। 577 खाली पद में रेशनलाइजेशन के बाद 430 पद रिक्त माने गए थे, जिनपर गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति होनी थी। अन्य विवि में नियुक्ति हो चुकी है या इसकी प्रक्रिया चल रही है। लेकिन मगध विवि में रोस्टर प्रक्रिया में मामला उलझा है।

बहाली में पेंच का कारण

1) आरक्षण में भ्रम प्रकाशित विज्ञापन में रोस्टर के आधार पर आरक्षण नहीं है। इसके कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। जनवरी 2020 में विवि ने रोस्टर के आधार पर आरक्षण की सूची भेजी, पर मामला अभी भी फंसा है। दूसरे, हाल के सालों में सरकार ने सैन्य विकलांगता व सवर्ण आरक्षण 10 फीसदी निर्धारित किया है। इसमें भी पेंच है, अगर किसी विभाग में पहले से पद पर नियुक्त शिक्षकों में सवर्ण की संख्या अधिक होगी, तब विज्ञापित पद का उसमें समायोजन हो जाएगा।

2) मगध विवि कार्यालय ने बताया, विवि ने विज्ञापन ही गलत निकाला था। विज्ञापन में न तो रोस्टर के आधार पर आरक्षण का और न ही पदों की संख्या बताई गई थी। हालांकि आवेदनों की छंटाई हो चुकी है, मार्क्स का टेबुलेशन भी हो चुका है। बस इसी पेंच में सारी प्रक्रिया फंसी है।

कितने हैं आरक्षित पद

विवि में कुल 1028 सृजित पदों में 451 पर शिक्षक कार्यरत हैं व 577 पद रिक्त हैं। रेशनालइजेशन के तहत 147 पद रिक्त रखे जाएगें। 75 फीसदी पदों 430 की रिक्ति निकाली गई थी। इसमें सामान्य के लिए 275, बीसी-एक के लिए 70, अनुसूचित जाति के लिए 62 पद, बीसी-दो के लिए 47, ईडब्लूएस के लिए 50 पद, ईडब्लूएस महिला के लिए 02 पद, बीसी महिला के लिए 02 पद, अनुसूचित जनजाति के लिए 05, जनजाति महिला के लिए 04, दिव्यांग के लिए 19, स्वतंत्रता सेनानी के लिए 14 पद रिक्त हैं।

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