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कृषि:व्यवसाय के लिए लगाए गए सेब बगान से फलों का निकलना शुरू

गयाएक महीने पहले
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  • गया व नवादा के 45-50 डिग्री तापमान पर सेब उत्पादन की चल रही कवायद
  • गया के फतेहपुर व नवादा के सिरदला में की है सेब की जैविक प्रायोगिक खेती
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(राजीव कुमार) सूबे में पहली बार गया की संस्था प्रिजर्वेशन एंड प्रोलिफिकेशन ऑफ रूरल रिसोर्सेस एंड नेचर (प्राण) ने जिले के फतेहपुर व नवादा जिले के सिरदला में सेब की प्रायोगिक खेती शुरू की है। दो साल पहले लगाए गए पौधों में अब फल लगने लगे हैं। फतेहपुर में दो व सिरदला में दो सौ पौधे लगाए हैं। अब इनमें फल लगने शुरू हुए हैं। प्राण के अनिल कुमार वर्मा ने बताया, हालांकि सेब ठंडी जलवायु में उगाया जाने वाला फल है, लेकिन गया-नवादा के 45-50 डिग्री सेल्सियस तापमान पर फसल उगाने की संभावना तलाशी जा रही है।

इसके लिए प्राण संस्था के विषय विशेषज्ञ प्रमोद गोराई के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम शिमला के विलासपुर में सेब उत्पादन की ट्रेनिंग ली। सेब की एचआरएमएन 99 वेराइटी लगाया गया है। इसे शिमला के हरिवंश शर्मा ने गर्म जलवायु के लिए अपने नर्सरी में विकसित किया है। पौधे को अधिकतम छह से सात फुट उंचाई तक रखा जाएगा। एक पेड़ से 20 से 25 किलो फल का उत्पादन होगा। सफलता मिलने पर हाई डेन्सिटी प्लांटेशन प्रक्रिया के तहत इसका बगीचा तैयार होगा।

जीवामृत से क्वालिटी सुधारने की कोशिश
गुड़ और बेसन सहित अन्य अवयवों से तैयार जैविक उर्वरक जीवामृत पौधे में डाला जा रहा है। गुड़ सुक्रोज व ग्लूकोज में परिवर्तित होकर इसमें मिठास बढ़ा सकता है। इसके उपयोग से फल अपनी चमक नहीं खोता है और गुणवत्ता भी बेहतर होता है। इसके अलावा प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर इंजाइम्स भी समय-समय पर डाले जा रहे हैं। ताकि उत्पादन अच्छा हो सके। 

काजू की तलाशी जा रही संभावना
जिले के छह प्रखंडों में अब काजू की खेती की संभावना तलाशी जा रही है। इसके लिए मिट्टी जांच की कार्रवाई चल रही है। जिले के फतेहपुर, बाराचट्‌टी, डोभी, आमस, इमामगंज व डुमरिया में इसकी पहल हो रही है। श्री वर्मा ने बताया कि झारखंड व उड़ीसा में बेहतर परिणाम मिलने के कारण गया में इसके बेहतर आसार हैं।

प्रति एकड़ पांच क्विंटल उत्पादन की संभावना
क्षेत्र के लिए काजू की प्रमुख किस्में वेगुरला 4, उल्लाल 2, उल्लाल 4, बीपीपी 1, बीपीपी 2, टी 40 आदि हैं, जिन्हें गया में लगाया जाएगा। प्रत्येक पेड़ से लगभग 8 किलो नट सलाना प्राप्त होने की संभावना है। एक एकड़ में लगभग पांच क्विंटल काजू ने नट प्राप्त होगें। प्रसंस्करण के बाद खाने योग्य काजू प्राप्त होगें। काजू के उत्पादन से गया के किसानों के साथ-साथ मजदूरों को भी काम मिलेगा।
सेब-काजू उत्पादन की असीम संभावनाएं 

सेब की स्थानीय फसल से फलदार उद्यान को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा काजू की सफलता से काफी संभावनाएं हैं। फसल से लाभ के अलावे प्रसंस्करण यूनिट भी स्थापित होगी, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। यह किसानों की समृद्धि बढ़ाएगी। -अनिल कुमार वर्मा, कृषि विशेषज्ञ

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