मां-बेटी से गैंगरेप केस में 28 जून को सुनवाई:रेप पीड़िताओं की पहचान खोलने में RJD MLA और पूर्व एमपी समेत 6 के खिलाफ शुरू हुई सुनवाई

गया5 महीने पहले

गया के गुरारु के सोनडीहा में 2018 सरेशाम मां-बेटी के साथ उसके पिता के समक्ष ही गैंगरेप किए जाने के मामले में पीड़िताओं की पहचान खोलने के आरोपियों के खिलाफ अब कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। अब दूसरी सुनवाई 28 जून को होगी। खास बात यह है कि उसकी पहचान खोलने वाले कोई और नहीं बल्कि राजद के कद्दावर नेता जिले के बेलागंज के विधायक सुरेंद्र यादव, पूर्व सांसद रामजी मांझी, पूर्व मंत्री आलोक मेहता, राजद जिलाध्यक्ष निजामुद्दीन, महिला प्रकोष्ठ की तत्कालीन जिलाध्यक्ष सरस्वती देवी व महिला प्रकोष्ठ की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष आभा लता थीं।

इन लोगों ने गैंगरेप पीड़िता मां-बेटी के साथ मगध मेडिकल कॉलेज में बड़े ही शान से फोटो खिंचवा कर उनकी पहचान सार्वजनिक की थी। इन सभी के खिलाफ 2018 में ही आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया गया था। अब इस मामले में सुनवाई शुरू हुई है। संबंधित मामले में पूर्व एसएसपी राजीव मिश्रा के आदेश पर पहचान सार्वजनिक करने वाले सभी छह आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। खास बात यह भी है कि इस मामले में सभी आरोपितों को सजा हो गई है। संबंंधित मामले की सुनवाई गया कोर्ट के एडीजे- 6 चल रही है।

वर्ष 2018 में एक ग्रामीण चिकित्सक अपने बीबी और बेटी को बाइक पर बैठा कर शाम को अपने घर को जा रहे थे। रास्ते में सोनडीहा के निकट अपराधियों ने हथियार के बल पर ग्रामीण चिकित्सक को रोक लिया था और जबरन उनकी पत्नी व बेटी के साथ उन्हीं के समक्ष सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले में मां-बेटी ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। रेप पीड़िता मां-बेटी का इलाज मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था। घटना के खुलासा होते ही गया से लेकर पटना तक मामला तूल पकड़ लिया था।

इस बीच राजद के कद्दावर नेता जिले के बेलागंज के विधायक सुरेंद्र यादव, पूर्व सांसद रामजी मांझी, पूर्व मंत्री आलोक मेहता, राजद जिलाध्यक्ष निजामुद्दीन, महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष सरस्वती देवी व महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष आभा लता मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुरसाहाल जानने को पहुंचे थे। इस दौरान सभी छह लोगों ने रेप पीड़िताओं के साथ फोटो भी खिंचवाए थे। जो अखबार में जबर्दस्त तरीके से सुर्खियां बनी थीं। अखबार में मामला प्रकाश में आने के बाद ही पुलिस ने पीड़िताओं की पहचान खोले के जाने के सभी छह आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

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